
अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में सरकारी तंत्र बेपरवाह बना हुआ है। प्रदेश के 55 जिला कार्यालयों को पिछले पांच साल के दौरान 14,586 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 10,350 यानी करीब 71 प्रतिशत का निराकरण अभी लंबित है। कुछ जिलों में तो 90 प्रतिशत से अधिक आवेदन लंबित हैं। पूरे प्रदेश में महज 3,953 आवेदनों का निराकरण ही हुआ है, इस दौरान 283 आवेदन निरस्त कर दिए गए।
पांच जिले तो ऐसे हैं, जिन्होंने एक भी आवेदन पर जवाब नहीं दिया। कटनी में 236, दमोह में 210, बुरहानपुर में 62, डिंडौरी में 37, झाबुआ में 23 आरटीआई लगाई गईं, लेकिन किसी आवेदन की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। पांढुर्ना में कोई आवेदन ही नहीं मिला। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदनों की पूरी स्थिति दर्ज होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भोपाल संभाग में भी स्थिति चिंताजनक है। अकेले भोपाल में ही 1,167 में से 797 आवेदन लंबित हैं। वहीं विदिशा में 301 में से 277, सीहोर में 301 में से 274 और राजगढ़ जिले में 122 में से 101 आवेदन लंबित हैं। रायसेन जिले में 189 आवेदन आए, इनमें से 15 निरस्त कर दिए और केवल नौ का जवाब दिया। 165 आवेदक इंतजार में हैं।
| जिला | कुल आवेदन | लंबित आवेदन | निराकरण | निरस्त |
| इंदौर | 1,129 | 875 | 254 | 0 |
| भोपाल | 1,167 | 797 | 353 | 17 |
| ग्वालियर | 1,485 | 454 | 975 | 56 |
| खरगोन | 495 | 437 | 55 | 3 |
| छिंदवाड़ा | 638 | 386 | 249 | 3 |
| छतरपुर | 414 | 373 | 41 | 0 |
| सिंगरौली | 338 | 327 | 11 | 0 |
| जबलपुर | 632 | 313 | 288 | 31 |
| शहडोल | 315 | 296 | 19 | 0 |
| विदिशा | 301 | 277 | 24 | 0 |
प्रदेश के जिलों में आरटीआई आवेदनों के निराकरण की स्थिति देखें तो कई जगह आवेदन लेने और जानकारी देने के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। शिवपुरी में 226 में से 221 आवेदन लंबित हैं। यानी करीब 98 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण नहीं हुआ। उज्जैन में 221 में से 213, श्योपुर में 96 में से 92, शाजापुर में 68 में से 64 और रीवा में 226 में से 210 आवेदन अटके हैं।
सिंगरौली में 338 आवेदनों में से केवल 11 का निराकरण हुआ, जबकि 327 लंबित हैं। इसी तरह शहडोल में 315 में से 19 और छतरपुर में 414 में से 41 आवेदनों का ही निराकरण किया गया। खरगोन में 495 आवेदनों में से 55 पर जानकारी दी गई और 437 लंबित हैं।
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इन जिलों में 88 से 97 प्रतिशत तक आवेदन लंबित हैं। दूसरी ओर, आवेदन निरस्त करने के मामलों में भी जिलों के बीच बड़ा अंतर है। ग्वालियर में 56, मंदसौर में 47 और सीधी में 27 आवेदन निरस्त किए गए। मंदसौर में तो 187 आवेदनों में से 47 निरस्त हुए।
लोक सूचना अधिकारियों द्वारा समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। प्रथम अपीलीय अधिकारी और द्वितीय अपीलीय अधिकारी के पास आवेदन करना पड़ता है, लेकिन राज्य सूचना आयोग में भी आयुक्तों की कमी के चलते पेंडेंसी बढ़ती जा रही है।- चंद्रशेखर गौड़, आरटीआई एक्टिविस्ट
आरटीआई में आवेदक को 30 दिन में जानकारी मिल जानी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता। आवेदकों को तीन से चार साल तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मांगी गई जानकारी का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। आरटीआई कानून में जानकारी उपलब्ध कराने के मापदंड और कड़े किए जाने चाहिए, ताकि 30 दिन में जानकारी मिल सके।- राहुल सिंह, पूर्व राज्य सूचना आयुक्त