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एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिले की बदलेगी तस्वीर! 400 करोड़ से होगा 644 गांवों का विकास

करीब चार दशक तक माओवादी हिंसा की समस्या से प्रभावित रहे बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में अब विकास का पहिया तेजी से दौड़ेगा। राज्य सरकार ने तीनों जि...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 07:12:42 PM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 07:12:42 PM (IST)
एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिले की बदलेगी तस्वीर! 400 करोड़ से होगा 644 गांवों का विकास
बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के लिए 400 करोड़ का रोडमैप

HighLights

  1. बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के लिए 400 करोड़ का रोडमैप
  2. 162 नई सड़कों और 17 नए 4G मोबाइल टावरों का प्रस्ताव
  3. दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर रहेगा जोर

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। करीब चार दशक तक माओवादी हिंसा की समस्या से प्रभावित रहे बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में अब विकास का पहिया तेजी से दौड़ेगा। राज्य सरकार ने तीनों जिलों के विकास के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है। पहले चरण में करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन अक्टूबर को भोपाल दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के सामने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने इसका प्रेजेंटेशन दिया था, जिसे सराहा गया है।

अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट पहुंचकर विकास कार्यों की घोषणा कर सकते हैं। इसके बाद काम शुरू होंगे। इसमें कुछ कार्य अल्पकालिक जबकि कुछ दीर्घकालिक योजना के तहत रखे गए हैं।

बुनियादी सुविधाओं का विस्तार: 162 नई सड़कें और 17 मोबाइल टावर

प्रदेश में माओवादी हिंसा की समस्या दिसंबर, 2025 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद सरकार का फोकस अब उन इलाकों में विकास की गति बढ़ाने पर है, जहां लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के कारण सड़क, बिजली और संचार जैसी सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल रहा। प्रभावित क्षेत्रों में 162 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिनमें 55 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृति मिल चुकी है। बालाघाट में 35 सड़कों के निर्माण के साथ 43 पुल-पुलिया को भी स्वीकृति दी गई है। मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए 17 नए 4जी टावरों का प्रस्ताव है, जिनमें नौ को अनुमति मिल चुकी है।


644 गांव अब भी विकास की मुख्यधारा से दूर

विकास के मामले में पिछड़े रहे 644 गांव माओवादी हिंसा की समस्या के कारण लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे तीनों जिलों में कुल 644 गांव हैं। इनमें बालाघाट के 469, मंडला के 115 और डिंडौरी के 60 गांव शामिल हैं। इन गांवों में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। करीब आधे गांवों तक पक्की सड़कें नहीं हैं और 250 से अधिक गांवों में सड़क संपर्क का अभाव है। छह गांव ऐसे हैं, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। नए मोबाइल टावर लगाने की जरूरत है।

बालाघाट में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर रहेगा विशेष ध्यान

हाल ही में बालाघाट में कुपोषण, खसरा और मलेरिया के संयुक्त प्रकोप से 34 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि माओवादी हिंसा की समस्या के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा। अब माओवादी समस्या समाप्त होने के बाद सरकार के सामने इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं की कमी दूर करने की चुनौती है। नए आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे।

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