
धनंजय प्रताप सिंह, नईदुनिया, भोपाल। एक बार फिर मध्य प्रदेश कांग्रेस में राज्यसभा सीट के लिए सिर फुटव्वल होने की संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है। कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखते हुए रिक्त हो रही तीन में से केवल एक सीट ही कांग्रेस के खाते में जाएगी। दिग्विजय सिंह राज्यसभा में वापसी चाहते हैं तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी ओबीसी वर्ग से होने को आधार बनाकर स्वयं दावेदारी करेंगे।
वह कमल नाथ की 15 महीने की सरकार में मंत्री रहे हैं लेकिन वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे। ओबीसी वर्ग से ही अरुण यादव की भी मजबूत दावेदारी है। वह पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। कांग्रेस के पास अभी यादव चेहरे की कमी भी है। इधर, कमल नाथ मध्य प्रदेश की राजनीति के इच्छुक नहीं हैं। फिर भी अपने स्तर पर राज्यसभा में पहुंचने के लिए जोर-आजमाइश कर रहे हैं।
दरअसल, मध्य प्रदेश में वर्ष 2020 में जब राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हुआ था तो कांग्रेस की गुटबाजी और राज्यसभा सदस्य बनने की लड़ाई के कारण तत्कालीन कमल नाथ सरकार गिरा दी गई थी। कांग्रेस में तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 22 विधायकों के साथ विद्रोह किया और कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी।
बड़ी वजह यही थी कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस की सुरक्षित सीट से राज्यसभा जाना चाहते थे और इस पर ही ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अधिकार जता रहे थे। बता दें, जून में मध्य प्रदेश से जार्ज कुरियन (अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री), दिग्विजय सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। दिग्विजय सिंह दो बार से मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद राज्यसभा का बचा कार्यकाल जार्ज कुरियन को मिला है।
राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने में तीन महीने बाकी हैं लेकिन संभावित प्रत्याशियों को लेकर कांग्रेस के आंतरिक मतभेद सामने आने लगे हैं। कुछ समय पहले दिग्विजय सिंह ने एक पोस्ट के माध्यम से संगठन की कमजोरी पर चिंता जाहिर की थी। हालांकि पार्टी के ही कुछ लोग इसे राज्यसभा चुनाव को लेकर दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।
उनका हाल का एक बयान 'न टायर्ड हूं और न ही रिटायर होने जा रहा हूं' भी यही संकेत दे रहा है कि वह सक्रिय राजनीति में बने रहना चाहते हैं। दिग्विजय सिंह की दावेदारी के कारण प्रत्याशी का चयन पार्टी के लिए चुनौती बन गया है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य यानी विधायक हैं। राज्यसभा के तीन सदस्यों के पद रिक्त हो रहे हैं। ऐसे में एक प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए 58 मतों की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भाजपा के 164 और कांग्रेस के 65 विधायक हैं, एक अन्य है। इस हिसाब से कांग्रेस को एक सीट मिलना तय है।