
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए 19 लाख चार हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। इनके द्वारा जो क्षेत्र पंजीकृत कराया है, वह 41 लाख 58 हजार हेक्टेयर है। यह पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। राजस्व विभाग से इसका सत्यापन कराया जा रहा है। इसके बाद स्लॉट बुकिंग प्रारंभ की जाएगी। खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दावा किया है कि दस अप्रैल से प्रारंभ होने वाले उपार्जन से पहले बारदाने की पूरी व्यवस्था हो जाएगी।
उन्होंने उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा कर कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए 78 लाख टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने प्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन दिया है। साथ ही एक बार उपयोग हो चुके और प्लास्टिक बैग के उपयोग की अनुमति दी गई है। जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण का प्रविधान किया है।
साथ ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च, अप्रैल, मई और जून का खाद्यान्न एक साथ दिया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख टन से अतिरिक्त भंडारण क्षमता मिलेगी। मध्य प्रदेश में देश की सर्वाधिक लगभग 400 लाख टन की कवर्ड भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें से लगभग 103 लाख टन भंडारण क्षमता खाली है।
उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को भोपाल में मीडिया से चर्चा में आरोप लगाया कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष नहीं शोषण वर्ष मनाया जा रहा है। पहले किसानों को खाद की लाइन में लगाया और अब युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी की जा रही है। सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2.60 करोड़ बारदाने का ही आवेदन किया, जिससे संकट खड़ा हुआ। न तो समय पर आवेदन किया और न ही अग्रिम भुगतान किया गया।
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जब सरकार खरीदी की तिथि लगातार बढ़ा रही तो फिर ऋण अदायगी की तिथि में संशोधन क्यों नहीं किया गया। जब उपज ही नहीं बिकेगी तो किसान ऋण कहां से चुकाएंगे। उन्होंने किसानों के समर्थन में प्रदेश भर की मंडियों में प्रदर्शन की घोषणा करते हुए कहा कि भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास के बाहर धरना देंगे।