
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित यूसीसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए अगले सप्ताह भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी के बाद विधि एवं विधायी विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पत्र के साथ विधेयक केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
सरकार गृह मंत्रालय से अनुरोध करेगी कि विधेयक को जल्द राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाई जाए, ताकि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को यूसीसी विधेयक पारित किया था। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानून का प्रविधान किया गया है। बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य करने तथा उत्तराधिकार में बेटे-बेटियों को समान अधिकार देने जैसे प्रविधान भी इसमें शामिल हैं। अनुसूचित जनजातियों को विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है।
विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू या प्रस्तावित यूसीसी के प्रावधानों का अध्ययन करने के साथ प्रदेश में व्यापक जन परामर्श किया था। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में 10 लाख से अधिक सुझाव और प्रतिक्रियाएं मिली थीं।
यह भी पढ़ें- एमपी पुलिस विभाग में बंपर प्रमोशन, 2500 अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगी पदोन्नति, नए साल पर मिलेगा तोहफा
राज्यों में यूसीसी लागू करने की शुरुआत उत्तराखंड से हुई। इसके बाद गुजरात ने मार्च 2026 में और असम ने मई 2026 में यूसीसी विधेयक पारित किया, पर अभी राष्ट्रपति की स्वीकृति बाकी है। इन राज्यों के पहले स्वीकृति मिलती है तो मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन जाएगा।
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों मुंबई में कहा था कि, मुझे विश्वास है कि वर्ष 2029 तक भाजपा-राजग शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर देंगे।