MP में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज के नियम बदले; 5 करोड़ की विन्यास निधि होगी रिफंड, जरूरी नहीं FDR
विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रमवार विद्यार्थियों की संख्या, मासिक फीस और कुल प्राप्त राशि का विवरण देना होगा। इसका सत्यापन कुलसचिव और मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी करेंगे।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 01:52:59 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 01:52:59 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- पांच करोड़ की विन्यास निधि होगी वापस
- हर साल देनी होगी पांच लाख रुपये फीस
- विद्यार्थियों की फीस का देना होगा हिसाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को अब पांच करोड़ रुपये की विन्यास निधि जमा रखने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। शासन ने पहले से जमा विन्यास निधि संबंधित निकायों को लौटाने का निर्णय लिया है। हालांकि, इसके बदले अब प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को हर साल पांच लाख रुपये वार्षिक फीस देनी होगी।
इस राशि का भुगतान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक मई तक करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं करने पर अधिकतम पांच हजार रुपये प्रतिमाह तक की पेनाल्टी लगाई जा सकेगी।
अधिसूचना जारी
उच्च शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) नियम, 2008 में संशोधन कर यह व्यवस्था लागू की है। इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार, निजी विश्वविद्यालयों द्वारा पहले जमा कराई गई विन्यास निधि उन्हें वापस की जाएगी।
सावधि जमा (एफडीआर) के रूप में रखी गई राशि की परिपक्वता के एक महीने के भीतर संबंधित निकाय को भुगतान करना होगा।
हालांकि, लौटाई गई राशि का उपयोग निकाय को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास के लिए करना अनिवार्य होगा। एफडीआर पर मिलने वाले ब्याज का निपटारा पूर्व में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
विद्यार्थियों से मिलने वाली फीस का देना होगा हिसाब
संशोधित नियमों में निजी विश्वविद्यालयों के लिए वित्तीय जानकारी देने की व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रमवार विद्यार्थियों की संख्या, उनसे ली जाने वाली मासिक फीस और कुल प्राप्त राशि का पूरा ब्योरा देना होगा। इस विवरण का सत्यापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव और मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी करेंगे।
इसके अलावा निकाय का नाम, पता, संपर्क विवरण और वार्षिक फीस भुगतान की जानकारी भी निर्धारित प्रारूप में देनी होगी। बैंक ड्राफ्ट या डिजीटल माध्यम से किए गए भुगतान का विवरण देना अनिवार्य होगा।
आयोग को मिलेगी फीस संशोधन की अनुमति
नए प्रावधानों के तहत आयोग राज्य सरकार की सहमति से वार्षिक फीस की राशि में समय-समय पर संशोधन कर सकेगा। निर्धारित फीस से प्राप्त राशि का उपयोग आयोग अपने वैधानिक कार्यों के संचालन में करेगा। आयोग इस राशि को बैंक में सावधि जमा के रूप में भी रख सकेगा। भुगतान के बाद विश्वविद्यालयों को आयोग की ओर से पावती जारी की जाएगी।