
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में संपत्ति कर और जल कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार जनगणना के साथ विशेष टैक्स सर्वे कराएगी। इसके तहत प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भौतिक सत्यापन करेंगे। इस दौरान जिन संपत्तियों पर दोनों कर लागू होने के बावजूद वे नगरीय निकाय के रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं या उनका कर जमा नहीं किया जा रहा है तो उनकी पहचान की जाएगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि जनगणना के दौरान एकत्र हो रहे आंकड़ों का उपयोग कर छूटी हुई संपत्तियों, नए निर्माणों और जल कनेक्शन का रिकॉर्ड तत्काल अपडेट किया जाए। विभाग के अनुसार संपत्ति और जल कर नगरीय निकायों की आय का प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में नए निर्माण और परिवर्तित उपयोग वाली संपत्तियां अब तक असेसमेंट रजिस्टर में दर्ज नहीं हो सकी हैं।
इससे निकायों को लगातार राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसी को देखते हुए जनगणना के दौरान प्रत्येक मकान के सत्यापन के साथ उसकी आवासीय, व्यावसायिक अथवा मिश्रित उपयोग की स्थिति का मिलान ई-नगरपालिका पोर्टल पर उपलब्ध रिकार्ड से कराया जाएगा।
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नगरीय आवास एवं विकास विभाग के पत्र के अनुसार प्रत्येक गणनाकर्ता लगभग 120 आवासों का सर्वे करेगा। इसके बाद संबंधित एआरआई, आरआई, एआरओ और अन्य अधिकारी संपत्ति कर और जल उपभोक्ता प्रभार के रिकार्ड का भौतिक सत्यापन कर आवश्यक संशोधन करेंगे। जहां जल कनेक्शन दर्ज नहीं हैं या अवैध कनेक्शन पाए जाते हैं, वहां भी रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। जिन निकायों में जीआइएस आधारित नंबरिंग लागू है, वहां मकान नंबर और यूनिक प्रापर्टी आइडी (यूपीआइडी) का भी मिलान कराया जाएगा।
जनगणना कार्य के दौरान हर भवन का भौतिक सत्यापन किया जाना है। इसी अवसर का उपयोग कर संपत्ति कर और जल उपभोक्ता प्रभार के रिकॉर्ड को भी अद्यतन किया जाएगा। इससे छूटी हुई संपत्तियां और जल कनेक्शन दर्ज होंगे।- प्रमोद कुमार शुक्ला, उप सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग।