डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन 31वें दिन भी जारी है। अभ्यर्थी अतिरिक्त पद बढ़ाकर एक और काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।पिछले 10 दिन से निर्जल भूख हड़ताल पर बैठे नरेंद्र राजपूत ने कहा कि वर्ष 2022 में 7,500 पद बढ़ाकर दूसरी काउंसलिंग कराई गई थी।
ऐसे में इस बार पदवृद्धि के लिए अलग नियम क्यों लागू किया जा रहा है।
नरेंद्र का कहना है कि यदि परिणाम जारी होने के बाद पदवृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है तो पूर्व में किस आधार पर पद बढ़ाए गए थे। उन्होंने सरकार से पुराने आदेशों और नियमों के आधार पर अभ्यर्थियों से चर्चा करने की मांग की है।
नरेंद्र राजपूत बोले- राहुल गांधी आंदोलन में शामिल होंगे
नरेंद्र राजपूत ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनका संपर्क हुआ है और उन्हें उनकी ओर से संदेश मिला है। उनके अनुसार, राहुल गांधी जल्द ही आंदोलन स्थल पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें राहुल गांधी के आने की पुष्टि मिली है।
राजपूत ने बताया कि उनकी रैंक 5427 है, जबकि 3631 रैंक तक अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इसी आधार पर वे अतिरिक्त पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी पदवृद्धि के उदाहरण हैं।
2022 में 7,500 पद बढ़ाने का दिया उदाहरण
वर्ग-3 के अभ्यर्थियों ने भी वर्ष 2022 की शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए पद बढ़ाकर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग की है। उनका दावा है कि 26 नवंबर 2022 के दस्तावेज में 7,500 पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग का उल्लेख है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछली भर्ती में अतिरिक्त पद बढ़ने से पहली काउंसलिंग में चयन से वंचित अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिला था। उनका सवाल है कि जब पिछली बार पदवृद्धि की गई थी तो इस बार इसे क्यों नहीं किया जा सकता।
18,750 पदों के बाद दोबारा काउंसलिंग का दावा
अभ्यर्थियों के अनुसार, 18,750 पदों के बाद परिणाम जारी होने पर दोबारा काउंसलिंग की गई थी। उनका यह भी दावा है कि संभाग, जिला और स्कूल स्तर पर परिणाम के बाद नियुक्तियां हुई हैं और इससे संबंधित लिखित आदेश उनके पास मौजूद हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग केवल पदवृद्धि और अतिरिक्त काउंसलिंग है। उनका दावा है कि हिंदी विषय में 99.86 परसेंटाइल हासिल करने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन नहीं हुआ है।
खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग
आंदोलनकारियों ने खून से पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन के बावजूद पदवृद्धि की मांग पर समाधान नहीं हुआ है।
पुलिस के नोटिस पर अभ्यर्थियों ने कहा- हमारे पास अनुमति
आंदोलन स्थल खाली करने के संबंध में पुलिस की ओर से नोटिस चस्पा किए जाने की बात भी सामने आई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सड़क बाधित नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उनके पास प्रदर्शन की अनुमति है। उनका दावा है कि वे सड़क के एक तरफ बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं और यातायात बाधित नहीं हो रहा।