श्रमोदय मेस घोटाला: भोपाल के बाद अब इंदौर में 1 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा, EOW की सुस्ती पर उठे सवाल
पीड़ित कंपनी का आरोप है कि श्रमोदय विद्यालय, इंदौर में मेस भुगतान से जुड़े करीब एक करोड़ रुपये की अनियमितता हुई, लेकिन ईओडब्ल्यू ने अब तक इस मामले को ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 02:50:34 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 02:50:34 PM (IST)
प्रतीकात्मक, सौ- इंटरनेट मीडियाHighLights
- इंदौर में एक करोड़ की कथित धोखाधड़ी की जांच नहीं
- भोपाल में 1.55 करोड़ रुपये का कथित मेस भुगतान फर्जीवाड़ा
- ईओडब्ल्यू ने इंदौर के मामले को जांच में शामिल नहीं किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । श्रमोदय विद्यालयों में मेस भुगतान से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में अब इंदौर के मामले भी जांच के दायरे से बाहर रहने के आरोप लगे हैं। पीड़ित कंपनी का दावा है कि भोपाल में करीब 1.55 करोड़ रुपये के कथित गबन के अलावा श्रमोदय विद्यालय, इंदौर में भी लगभग एक करोड़ रुपये की वित्तीय क्षति हुई है।
इसके बावजूद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने अब तक इंदौर से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू नहीं की है। मामले में मुख्य आरोपित गौरव शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका भी भोपाल न्यायालय खारिज कर चुका है।
ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर सवाल
पीड़ित कंपनी के अधिवक्ता शुभांक दीक्षित और अंकुर पांडेय के अनुसार गौरव शर्मा इंदौर स्थित श्रमोदय विद्यालय में प्रबंधक के पद पर कार्यरत था। कंपनी ने 24 दिसंबर 2025 को ईओडब्ल्यू के नोटिस के जवाब में इंदौर में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े तथ्य प्रस्तुत किए थे।
इसके बावजूद इस मामले को अब तक जांच में शामिल नहीं किया गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि इंदौर की कथित एक करोड़ रुपये की क्षति भोपाल में दर्ज मामले से अलग है।
90 दिन बाद भी एक्शन नहीं
भोपाल में कथित 1.55 करोड़ रुपये के मेस भुगतान फर्जीवाड़े में ईओडब्ल्यू ने बीती 27 मई को सात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। कंपनी का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के 90 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी न किसी आरोपित की गिरफ्तारी हुई, न रिमांड मांगी गई और न ही आरोप-पत्र प्रस्तुत किया गया। मुख्य आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी कंपनी जांच की गति पर सवाल उठा रही है।
बैंक खातों व लेनदेन की जांच की मांग
अधिवक्ता ने न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत आवेदन देकर संबंधित बैंक खातों के केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने के अभिलेख, प्रमाणित बैंक विवरण, लेनदेन का पूरा रिकार्ड और भुगतान से जुड़े मूल दस्तावेज सुरक्षित कराने की मांग की है। कंपनी को आशंका है कि वित्तीय साक्ष्य समय रहते सुरक्षित नहीं किए गए तो जांच प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में न्यायालय ने ईओडब्ल्यू को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित है।
कंपनी के अधिवक्ताओं का कहना है कि भोपाल के साथ इंदौर में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके।