
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रातापानी टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में 90 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। यह भट्ठे नासीपुर, बमनई, करमई, जौंदरा, कुकाखो और बीरान आदि गांवों में चल रहे हैं। इस बात खुलासा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पेश की गई रातापानी वन्यप्राणी अभयारण्य के अधीक्षक की रिपोर्ट में हुआ है।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि 11 अगस्त 2017 की ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचना के तहत ईंट भट्ठों का संचालन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इनका संचालन जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि भट्ठों के पास वन विभाग की वैध अनुमति नहीं है और जल एवं वायु प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जरूरी सहमति भी प्राप्त नहीं की गई।
बता दें कि ग्राम पंचायत बमनई के सरपंच की ओर से 14 नवंबर 2025 को एनजीटी को भेजे गए पत्र भेजकर रातापानी के बफर क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण फैलाने वाले ईंट भट्ठों को बंद कराने की मांग की गई थी। एनजीटी ने पत्र पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की। मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
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