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रातापानी टाइगर रिजर्व के Eco-Sensitive Zone में 90 ईंट भट्ठे! NGT ने निगरानी तंत्र पर उठाए सवाल

रातापानी टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में 90 ईंट भट्ठे बिना अनुमति संचालित मिले। एनजीटी ने निगरानी तंत्र पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:12:45 AM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:12:45 AM (IST)
रातापानी टाइगर रिजर्व के Eco-Sensitive Zone में 90 ईंट भट्ठे! NGT ने निगरानी तंत्र पर उठाए सवाल
रातापानी टाइगर रिजर्व के Eco-Sensitive Zone में 90 ईंट भट्ठे। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. रातापानी ईको-सेंसिटिव जोन में 90 ईंट भट्ठे संचालित मिले।
  2. नासीपुर सहित कई गांवों में भट्ठे चल रहे हैं।
  3. भट्ठों के पास वन विभाग की वैध अनुमति नहीं मिली।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रातापानी टाइगर रिजर्व के ईको-सेंसिटिव जोन में 90 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। यह भट्ठे नासीपुर, बमनई, करमई, जौंदरा, कुकाखो और बीरान आदि गांवों में चल रहे हैं। इस बात खुलासा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पेश की गई रातापानी वन्यप्राणी अभयारण्य के अधीक्षक की रिपोर्ट में हुआ है।

निगरानी तंत्र पर उठे सवाल

  • इनकी बड़ी संख्या में ईंट भट्ठों के संचालन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर एनजीटी ने निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अधिकरण ने कहा है कि ईको-सेंसिटिव जोन मानिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर और सदस्य सचिव डीएफओ ने भट्ठों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए अपने अधिकारों का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं किया।

  • एनजीटी ने अब रायसेन कलेक्टर, ईको-सेंसिटिव जोन मानिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष, डीएफओ और समिति के सदस्य सचिव तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अवैध रूप से संचालित भट्ठों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
  • बिना अनुमति के चल रहे भट्ठे

    मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि 11 अगस्त 2017 की ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचना के तहत ईंट भट्ठों का संचालन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इनका संचालन जारी है। जांच में यह भी सामने आया कि भट्ठों के पास वन विभाग की वैध अनुमति नहीं है और जल एवं वायु प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जरूरी सहमति भी प्राप्त नहीं की गई।

    बमनई सरपंच के पत्र पर एनजीटी ने लिया स्वत: संज्ञान

    बता दें कि ग्राम पंचायत बमनई के सरपंच की ओर से 14 नवंबर 2025 को एनजीटी को भेजे गए पत्र भेजकर रातापानी के बफर क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण फैलाने वाले ईंट भट्ठों को बंद कराने की मांग की गई थी। एनजीटी ने पत्र पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की। मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

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