
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में पंजीकृत वाहनों की संख्या ढाई करोड़ के करीब पहुंच गई, लेकिन इनकी निगरानी, जांच सहित अन्य जिम्मेदारी संभालने वाले परिवहन विभाग का अमला लगातार कम होता जा रहा है।
वर्तमान में यहां स्वीकृत 1696 पदों में से 874 यानी 51.5 प्रतिशत पद रिक्त हैं, केवल 822 कर्मचारी-अधिकारी कार्यरत हैं। यह स्थिति तब है जबकि प्रदेश में वाहनों की संख्या पिछले डेढ़ दशक में ढाई गुना बढ़ गई है।
परिवहन विभाग की पदवार स्थिति के अनुसार क्षेत्रीय/अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के सभी 38 पद रिक्त हैं, जबकि क्षेत्रीय उप परिवहन आयुक्त के 10 में से एक पद रिक्त है। इसी तरह से सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों के 64 पदों में से 23, परिवहन निरीक्षक के 70 में 65 एवं मोटरयान परिवहन निरीक्षक के 15 में छह पद रिक्त हैं।
परिवहन उप निरीक्षक के 102 स्वीकृत पदों में 49 रिक्त हैं। सहायक परिवहन उप निरीक्षक के सभी 34 पद खाली हैं। प्रधान आरक्षक और प्रधान आरक्षक वाहन चालक के 120 पदों में 94 रिक्त हैं। आरक्षक के 342 पदों में 34 रिक्त हैं और आरक्षक चालक के 38 पदों में 30 खाली हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अभी पंजीकृत वाहनों की संख्या 2.42 करोड़ से अधिक है। जबकि वर्ष 2011 में यह संख्या करीब एक करोड़ थी। यानी पिछले 15 साल में ढाई गुना की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इस अनुपात में परिवहन विभाग के स्वीकृत पदों में बढ़ोतरी नहीं की गई।
विभाग ने सेवाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में काम किया, लेकिन यह व्यवस्था भी तभी संभव है जब उसके पीछे जांच, सत्यापन और प्रवर्तन के लिए पर्याप्त अमला हो। विधानसभा में सरकार ने परिवहन विभाग में रिक्तियों का कारण सेवानिवृत्ति और लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने को बताया था।
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परिवहन विभाग में पर्याप्त नियमित अमला न होने के कारण दूसरे विभागों, खासकर पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों-कर्मचारियों को लेने की व्यवस्था पर निर्भरता बढ़ी है। लेकिन पुलिस विभाग से प्रतिनियुक्ति पर परिवहन में गए तत्कालीन आरक्षक सौरभ शर्मा के भ्रष्टाचार मामले ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिसंबर 2025 में लोकायुक्त छापे के बाद उसके यहां 100 करोड़ रुपये की संपत्ति पता चली।
उधर, परिवहन आयुक्त उमेश जोगा का कहना है कि काडर रिव्यू का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक संवर्ग में पद बढ़ाने की तैयारी है। पद बढ़ने के बाद भर्ती का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।