
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। यूपीआई पर लागू शुल्क (एमडीआर) के विरोध में इंदौर के व्यापारियों के आंदोलन को प्रदेश के अन्य शहरों से भी समर्थन मिल रहा है। 23 सितंबर को इंदौर के व्यापारी संगठनों ने नो यूपीआई डे मनाने का ऐलान किया है।
अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के बैनर तले शहर के सवा सौ व्यापारी संगठनों ने इसमें शामिल होने का आह्वान किया था। अब अन्य शहरों से भी इसे समर्थन मिल रहा है। व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान पर लग रहे इस शुल्क को महंगाई बढ़ाने वाला करार दिया है।
अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार शहर के लगभग सभी प्रमुख व्यापारी संगठन 23 सितंबर को यूपीआई से भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। इसमें सराफा, कपड़ा कारोबारी, लोहा व्यापारी, प्लाईवुड, सेनेटरी, चाय किराना, पेट्रोल-डीजल व्यापारी जैसे तमाम संगठन शामिल हैं।
ग्राहकों से अपील की जा रही है कि वे भी इस दिन नकद भुगतान को ही चुनें। इंदौर के साथ अब ग्वालियर, भोपाल, मंदसौर, नीमच जैसे शहरों से भी हमारे पास व्यापारी संगठनों का समर्थन आया है। इंदौर के आंदोलन का प्रभाव अन्य शहरों में भी देखा जा सकता है।
सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने भी ऐलान किया है कि प्रदेशभर के मंडी व्यापारी इस शुल्क का विरोध करेंगे। अग्रवाल के अनुसार पहले जीएसटी में सरकार ने दावा किया था कि खाद्य वस्तुओं को मुक्त रखा जाएगा लेकिन धीरे-धीरे लगभग सभी खाने की वस्तुएं जीएसटी के दायरे में आ गईं।
आगे एमडीआर पर भी ऐसा होगा। यह शुल्क महंगाई बढ़ाने वाला साबित होगा क्योंकि भुगतान पर जो अतिरिक्त पैसा लगेगा उसे व्यापारी को उत्पाद की कीमत बढ़ाकर लागत में शामिल करना पड़ेगा।
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इस बीच यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क पर अब नया सवाल खड़ा किया है। इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि सरकार व्यापारी से यूपीआई भुगतान स्वीकारने पर टैक्स वसूल लेगी।
लेकिन यदि ऐसी स्थिति बनी जहां व्यापारी ने भुगतान लिया और सरकार को शुल्क चुकाया, बाद में ग्राहक ने वह माल या वस्तु लौटा दी। ऐसे में माल वापसी पर व्यापारी को पूरा पैसा ग्राहक को वापस करना होगा। जबकि सरकार उस भुगतान पर व्यापारी से शुल्क वसूल चुकी होगी। ऐसी स्थिति में विवाद की स्थिति बनेगी। माल वापसी और बेहतर सेवा देने वाली बाजार की प्रवृत्ति भी हतोत्साहित होगी।