MP में बिजली सरचार्ज में 2.72% की कटौती, 500 यूनिट खपत पर बचेंगे 90 रुपये
सरचार्ज में कटौती का फायदा घरेलू सहित सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मिलेगा। 200 यूनिट खपत पर 31.50 रुपये, 300 यूनिट पर 50.70 रुपये और 500 यूनिट पर 90 रुपये की बचत होगी।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 10:25:37 AM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 10:50:49 AM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- सरचार्ज 5.063 प्रतिशत से घटाकर 2.34 प्रतिशत हुआ
- मप्र के उपभोक्ताओं को 23 अक्टूबर से जारी बिलों में मिलेगा लाभ
- 300 यूनिट पर 50.70 रुपये और 500 यूनिट पर 90 रुपये की बचत
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। महंगे बिजली बिलों से परेशान प्रदेश के उपभोक्ताओं को इस महीने थोड़ी राहत मिलने जा रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने बिजली बिल में लगने वाले फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) में कटौती की है।
इसे 5.063 प्रतिशत से घटाकर 2.34 प्रतिशत कर दिया गया है। इस तरह सरचार्ज में 2.723 प्रतिशत की कमी की गई है। इसका लाभ 23 अक्टूबर 2026 से जारी होने वाले बिजली बिलों में मिलेगा। यह राहत घरेलू सहित सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मिलेगी।
खपत के अनुसार होगी बचत
सरचार्ज में कटौती से बिजली की खपत के अनुसार उपभोक्ताओं के बिल में अंतर आएगा। उदाहरण के तौर पर 200 यूनिट बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ता का बिल पहले 1213.50 रुपये आता था, जो अब घटकर 1182 रुपये रह जाएगा। यानी उपभोक्ता को 31.50 रुपये की बचत होगी।
इसी तरह 300 यूनिट खपत पर पहले 1954.20 रुपये का बिल बनता था, जो अब 1903.50 रुपये होगा। इससे 50.70 रुपये की राहत मिलेगी। वहीं, 500 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ता को पहले 3475 रुपये देने पड़ते थे, जबकि अब बिल 3385 रुपये आएगा। इस तरह उसे 90 रुपये कम चुकाने होंगे।
फिलहाल एक महीने के लिए राहत
भोपाल सिटी सर्किल दक्षिण के डीजीएम राकेश त्रिपाठी बताते हैं कि एफपीपीएएस बिजली खरीद की लागत में होने वाले उतार चढ़ाव के आधार पर लगाया जाता है। बिजली खरीद की लागत बढ़ने या घटने का असर इस सरचार्ज पर पड़ता है।
सरचार्ज में 2.723 प्रतिशत की कटौती का मतलब यह नहीं है कि कुल बिजली बिल भी इतने प्रतिशत कम हो जाएगा। वास्तविक बचत उपभोक्ता की बिजली खपत और लागू बिजली दरों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल उपभोक्ताओं को यह राहत एक महीने के लिए मिलेगी। इसके बाद बिजली खरीद की लागत के आधार पर सरचार्ज की दर में फिर बदलाव हो सकता है।