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MP में 48 लाख रजिस्ट्रियों पर ब्रेक, स्वामित्व योजना में पटवारियों का इनकार, 3800 करोड़ की योजना उलझी

गांवों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए शुरू की गई स्वामित्व योजना अब पटवारियों के विरोध में उलझ गई है। पिछले 20 दिन से पटवारी ...और पढ़ें

By Madanmohan malviyaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 07 Oct 2026 09:10:08 AM (IST)Updated Date: Wed, 07 Oct 2026 09:11:17 AM (IST)
MP में 48 लाख रजिस्ट्रियों पर ब्रेक, स्वामित्व योजना में पटवारियों का इनकार, 3800 करोड़ की योजना उलझी
स्वामित्व योजना में पटवारियों ने निष्पादक बनने से किया इनकार (AI तस्वीर)

HighLights

  1. पटवारियों ने निष्पादक बनने से किया इनकार
  2. कहा- विवाद में कोर्ट के चक्कर कौन लगाएगा
  3. इससे 48 लाख रजिस्ट्रियों पर ब्रेक लग गया है

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। गांवों की आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के लिए शुरू की गई स्वामित्व योजना अब पटवारियों के विरोध में उलझ गई है। पिछले 20 दिन से पटवारी इस योजना की रजिस्ट्री कराने से इनकार कर रहे हैं। मंगलवार को भदभदा स्थित सहयाद्री परिसर में पटवारी संघ के जिलाध्यक्षों की बैठक में भी रजिस्ट्री के निष्पादक की भूमिका नहीं निभाने का फैसला दोहराया गया। संघ के इस रुख से प्रदेशभर में करीब 48 लाख रजिस्ट्रियों पर ब्रेक लग गया है।

करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की है तैयारी

सरकार करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है, जिस पर 3800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने कहा कि संघ ने इस मामले में कानूनी सलाह ली है। पटवारियों को निष्पादक की भूमिका से हटाए जाने के बाद ही वे रजिस्ट्री का काम करेंगे। संघ का तर्क है कि लीज डीड में पटवारी का नाम शामिल होने से भविष्य में जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद होने पर उन्हें भी कोर्ट में पक्षकार बनाया जा सकता है।


सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को भी शामिल किया है। इन अधिकारियों को योजना के तहत पंजीयक के अधिकार दिए गए हैं। वे योजना का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि अपनी कानूनी जिम्मेदारी तय किए जाने पर आपत्ति है।

हरियाणा-राजस्थान का हवाला

संघ ने दावा किया कि हरियाणा और राजस्थान में अधिकार अभिलेख देने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री में पटवारियों को निष्पादक बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में विवाद होने पर इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

यह भी पढ़ें- एमपी में 68 लाख लोगों को मिलेंगे संपत्ति के अधिकार, 22 हजार पटवारी बनाएंगे संपत्तियों के दस्तावेज, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

3500 से 4000 रजिस्ट्रियां रोज

प्रदेश में सामान्य दिनों में रोजाना औसतन 3500 से 4000 रजिस्ट्रियां होती हैं। ऐसे में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्रियों पर रोक का सीधा असर ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले मालिकाना हक की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।

पटवारियों की अन्य मांगें

  • 2100 से बढ़ाकर 2400 रुपये ग्रेड पे करने की मांग।
  • पीएम किसान, सीएम किसान और फार्मर आईडी का काम कृषि विभाग को देने की मांग।
  • अतिरिक्त काम का भार कम करने की मांग।
  • सरकार कार्रवाई करती है तो सामूहिक रणनीति बनाने की चेतावनी।