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एमपी में 68 लाख लोगों को मिलेंगे संपत्ति के अधिकार, 22 हजार पटवारी बनाएंगे संपत्तियों के दस्तावेज, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत निजी संपत्तियों के अभिलेख और स्वामित्व दस्तावेज तैयार करने के लिए 22 हजार पटवारियों को कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने क...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 02:49:53 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 02:49:53 PM (IST)
एमपी में 68 लाख लोगों को मिलेंगे संपत्ति के अधिकार, 22 हजार पटवारी बनाएंगे संपत्तियों के दस्तावेज, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश के 68 लाख भू-स्वामियों के लिए राहत।

HighLights

  1. मध्य प्रदेश के 68 लाख भू-स्वामियों के लिए राहत
  2. पटवारी व्यक्तिगत रूप से करेंगे योजना के लिए काम
  3. जबलपुर हाई कोर्ट में सरकार का तर्क हुआ मंजूर

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत निजी संपत्तियों के अभिलेख और स्वामित्व दस्तावेज तैयार करने के लिए 22 हजार पटवारियों को कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार के 13 अगस्त 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली प्रांतीय पटवारी संघ की याचिका हाई कोर्ट से वापस ले ली गई।

न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लिए जाने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के करीब 68 लाख लोगों की संपत्तियों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।


सरकार की आपत्ति पर संघ ने वापस ली याचिका

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और शासकीय अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ल उपस्थित हुए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिका की विचारणीयता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत जिम्मेदारी पटवारियों को व्यक्तिगत रूप से सौंपी है।

ऐसे में पटवारी संघ को अपने सदस्यों की ओर से इस आदेश को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। सरकार की इस आपत्ति के बाद याचिकाकर्ता संघ ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

13 अगस्त के आदेश को दी गई थी चुनौती

केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत राज्य सरकार ने 13 अगस्त, 2026 को आदेश जारी कर मैदानी स्तर पर कार्यरत पटवारियों को कार्यकारी अधिकारी नामित किया था। उन्हें योजना के अंतर्गत निजी संपत्तियों के अभिलेख और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तैयार करने से जुड़े कार्य सौंपे गए हैं। इसी आदेश की वैधानिकता और पटवारियों को सौंपी गई जिम्मेदारियों को लेकर प्रांतीय पटवारी संघ ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अधिकार और जिम्मेदारी को लेकर उठाए थे सवाल

पटवारी संघ की ओर से तर्क दिया गया था कि पटवारी राजस्व प्रशासन में मैदानी स्तर पर कार्य करने वाला कर्मचारी है। संपत्ति के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य सामान्यतः राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में पटवारियों को इस प्रकार की जिम्मेदारी सौंपे जाने के लिए स्पष्ट वैधानिक और प्रशासनिक प्रविधान होना चाहिए।

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भविष्य में संपत्ति विवाद की आशंका जताई

याचिका में यह भी कहा गया था कि स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों के अभिलेख तैयार करने के दौरान भविष्य में मालिकाना हक, सीमांकन और बंटवारे जैसे विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पटवारियों के व्यक्तिगत रूप से कानूनी विवादों और मुकदमों में उलझने की आशंका भी जताई गई थी।

आदेश की प्रक्रिया पर भी उठाए थे सवाल

संघ ने सरकार के 13 अगस्त के आदेश की जानकारी उसे मिलने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। याचिका के अनुसार संघ ने सात और 10 सितंबर को अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद 11 सितंबर को आदेश की प्रति वाट्सएप के माध्यम से साझा किए जाने का दावा किया गया था। इसी आधार पर संघ ने आदेश जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई थी।

अब व्यक्तिगत रूप से करेंगे योजना का काम

हाई कोर्ट में याचिका वापस लिए जाने के बाद सरकार के 13 अगस्त के आदेश को इस याचिका में चुनौती जारी नहीं रहेगी। परिणामस्वरूप स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी के अनुसार प्रदेश में निजी संपत्तियों के अभिलेख और स्वामित्व दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।