'देश के 60 लाख आंगनबाड़ी वर्कर, आशा और रसोइयों को मिले पक्की नौकरी' भोपाल में जुटे 18 राज्यों ने बुलंद की आवाज
राष्ट्रीय अधिवेशन में मांग की गई कि देश की 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं, 10 लाख आशा कार्यकर्ताओं और 25 लाख रसोइयों को आधिकारिक रूप से कर्...और पढ़ें
By shusheel pandeyEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 08:15:47 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 08:15:47 PM (IST)
संगठनों ने अपनी मांगों के समर्थन में आईकफ आश्रम के बाहर रैली भी निकाली। सौ- आयोजक HighLights
- भोपाल में खाद्य अधिकार सम्मेलन में 18 राज्यों के प्रतिनिधि जुटे
- बच्चों को पोषण योजनाओं से वंचित नहीं करने की मांग उठाई
- आंगनबाड़ी, आशा व रसोइयों को पक्की नौकरी देने की मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। आधार नहीं होने या उससे जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण किसी भी बच्चे को आंगनबाड़ी, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति और अन्य अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए। बच्चों के लिए फेस रिकग्निशन, ई-केवायसी और अनिवार्य ऐप जैसी व्यवस्थाओं को बंद किया जाए।
आंगनबाड़ी और स्कूलों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री से गर्म पका भोजन दिया जाए। बच्चों के भोजन और पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के निजीकरण और व्यावसायीकरण को रोका जाए।
ये प्रमुख मांगें बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार पर आईकफ आश्रम में आयोजित तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन जारी हुए भोपाल घोषणा पत्र में शामिल की गई हैं।
‘आंगनबाड़ी ठीक करो’ अभियान
अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर पर ‘आंगनबाड़ी ठीक करो’ अभियान चलाने, बच्चों के भोजन के अधिकार पर राज्यों में अधिवेशन आयोजित करने और राष्ट्रीय स्तर पर साझा कार्रवाई करने का भी निर्णय लिया गया।
सम्मेलन में 18 राज्यों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, ऑल इंडिया फेडरेशन आफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स की महासचिव एआर सिंधु और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा प्रमुख रूप से शामिल हुए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा और रसोइयों को मिले कर्मचारी का दर्जा
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं देने वाली 60 लाख से अधिक महिलाओं को कर्मचारी न मानकर केवल स्वयंसेवक माना जा रहा है। इस कारण वे श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले संरक्षण और अधिकारों से वंचित हैं।
मांग की गई कि देश की 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं, 10 लाख आशा कार्यकर्ताओं और 25 लाख रसोइयों को आधिकारिक रूप से कर्मचारी घोषित किया जाए।
निजीकरण रोकने की मांग
घोषणापत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों से तैयार गर्म पका हुआ भोजन देने तथा बच्चों के सरकारी खाद्य व पोषण कार्यक्रमों के निजीकरण और व्यावसायीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने पर जोर दिया गया है।
इसके अलावा आईसीडीएस और पीएम पोषण का प्रभावी सोशल ऑडिट कराने, आदिवासी व दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने, स्कूलों के दो सौ मीटर के दायरे में जंक फूड पर प्रतिबंध लगाने और स्कूलों में किचन गार्डन विकसित करने का आह्वान किया गया।