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मध्य प्रदेश में सात लाख टन कचरे के बीच रहने को मजबूर 10 गांवों के लोग, हर दिन 5 से 6 मरीज पहुंच रहे भोपाल

भोपाल से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 800 टन कचरे को जिस आदमपुर कचरा खंती में डंप किया जा रहा है, अब वहां जमा करीब सात लाख टन कचरे का पहाड़ बन गया है, जि...और पढ़ें

By anuj mainaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 05 Jul 2026 04:27:18 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Jul 2026 04:27:18 PM (IST)
मध्य प्रदेश में सात लाख टन कचरे के बीच रहने को मजबूर 10 गांवों के लोग, हर दिन 5 से 6 मरीज पहुंच रहे भोपाल
मध्य प्रदेश में सात लाख टन कचरे के बीच रहने को मजबूर 10 गांवों के लोग

HighLights

  1. भोपाल की आदमपुर खंती में जमा हुआ 7 लाख टन कचरे का विशाल पहाड़
  2. गंदगी व मच्छरों के आतंक से 10 से ज्यादा गांवों के लोग हो रहे बीमार
  3. नगर निगम का दावा: दिसंबर तक वैज्ञानिक तरीके से होगा कचरा निपटान

अनुज मैना, नईदुनिया, भोपाल। शहर से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 800 टन कचरे को जिस आदमपुर कचरा खंती में डंप किया जा रहा है, अब वहां जमा करीब सात लाख टन कचरे का पहाड़ बन गया है, जिसका असर आसपास के गांवों के लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। आदमपुर, हरिपुरा, खजूरी, कोलुआ, पड़रिया, छावनी पठार, बिलखिरिया समेत 10 से अधिक गांवों में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ने से बुखार, त्वचा रोग, एलर्जी और उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

बता दें कि जनवरी 2018 में भानपुर कचरा खंती को बंद करने के बाद से ही आदमपुर खंती में कचरा डंप किया जा रहा है। शहर से प्रतिदिन करीब 800 टन कचरा निकलता है और वर्षों के दौरान यहां करीब सात लाख टन कचरे का पहाड़ खड़ा हो चुका है। बच्चों और बुजुर्गों में बुखार, त्वचा रोग, एलर्जी और उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।


सेहत के साथ जेब पर भी पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

बीमारी का असर अब लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि केवल एक गांव से ही प्रतिदिन पांच से छह लोग इलाज के लिए भोपाल पहुंच रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों के आसपास पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

आदमपुर कचरा खंती: एक नजर में (फैक्ट फाइल)

  • 2018 से आदमपुर खंती में डंप हो रहा है भोपाल का कचरा।
  • 800 टन कचरा प्रतिदिन भोपाल शहर से निकलता है।
  • 7 लाख टन कचरा आदमपुर खंती में जमा हो चुका है।
  • 10 से अधिक गांव सीधे प्रभावित हैं।
  • 5 से 6 मरीज एक गांव से प्रतिदिन इलाज के लिए भोपाल पहुंच रहे हैं।

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कचरा खंती की वजह से गांव में मच्छर और मक्खियां बहुत बढ़ गई हैं। रातभर मच्छरों के कारण ठीक से नींद नहीं आती और दिन में मक्खियां खाना तक नहीं खाने देतीं। हमारे गांव में कई लोग बुखार और त्वचा की बीमारी से परेशान हैं। इलाज के लिए भोपाल जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। गांव से हर दिन पांच-छह लोग इलाज के लिए भोपाल जाते हैं। कई मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। - भीम सिंह बंजारा, रहवासी, हरिपुरा

कचरा खंती की बदबू और गंदगी की वजह से छोटे बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत बार-बार खराब हो रही है। आसपास अच्छा अस्पताल नहीं होने से भोपाल के निजी अस्पतालों में इलाज कराना मजबूरी है। कई बार शिकायत की, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। फागिंग और कीटनाशक छिड़काव भी कभी-कभार ही होता है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में संक्रामक बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। - प्रताप सिंह, रहवासी, बिलखिरिया

कचरा खंती बनने के बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। पहले ऐसी परेशानी नहीं थी। अब हर बारिश में बीमारी फैलने का डर बना रहता है। कचरा बनने के बाद शुरुआत में तो केवल बदबू की समस्या थी, लेकिन अब मच्छर और मक्खियां सबसे बड़ी परेशानी बन गए हैं। कई लोग बुखार और त्वचा की बीमारी से परेशान हैं। बुखार, त्वचा रोग, उल्टी-दस्त और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ गई हैं। गांव से रोज कई लोग इलाज के लिए भोपाल जाते हैं। - सुरेंद्र कुशवाहा, रहवासी, कोलुआ

आदमपुर कचरा खंती में कचरे के निष्पादन का काम शुरू हो चुका है। नगर निगम का प्रयास है कि जल्द से जल्द पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए। काम तेजी से चल रहा है और दिसंबर तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। - संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम