
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारी को लेकर निगमायुक्त संस्कृति जैन सख्त नजर आ रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले अमले की लापरवाही के चलते शहर के खाली प्लाटों में डाले जाने वाले कचरे पर रोक नहीं लग पा रही है। निगमायुक्त ने शहर की सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए आइएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों तक को एक-एक जोन की जिम्मेदारी सौंप दी है, जिन्हें सुबह छह से नौ बजे तक अपने जोन में जाकर सफाई व्यवस्था देखनी है, लेकिन इनमें से कई अधिकारी तो मैदान में पहुंच ही नहीं रहे हैं और फोन पर ही प्रभारी एएचओ से जानकारी लेकर इतिश्री कर लेते हैं।
यही वजह है कि खुले प्लाटों में कचरा डाला जा रहा है, कई जगह उसे जलाया जा रहा है और इससे उठता धुआं सीधे लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि नगर निगम के कर्मचारी खुद नियमों की अनदेखी करते हुए कचरे में आग लगा रहे हैं। निगमायुक्त के सख्त निर्देशों के बावजूद मैदानी अमला लापरवाही पर उतारू है, जिससे पूरे सिस्टम की जवाबदेही और कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
टीटी नगर दशहरा मैदान- कई दिनों से नहीं उठा कचरा
टीटी नगर दशहरा मैदान के आसपास हालात बेहद खराब हैं। यहां बड़ी मात्रा में कचरा खुले में पड़ा हुआ है और इसे हटाने की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती। कचरा देखकर लगता है कि यहां से कई दिनों से कचरा नहीं उठाया गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस कचरे में बार-बार आग लग जाती है, जिससे उठने वाला धुआं पूरे इलाके में फैलता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारी यहां नजर नहीं आते।
तुलसी नगर- निगम मुख्यालय से 100 मीटर दूर ही खुले में पड़ा है कचरा
तुलसी नगर सेकंड स्टॉप के पास अंबेडकर पार्क के पीछे खाली पड़ी जमीन कचरा फेंकने का स्थायी स्थान बन चुकी है। यहां पॉलिथिन, कपड़े और घरेलू कचरे के ढेर लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम का नया मुख्यालय यहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर है, इसके बावजूद इस जगह की सुध नहीं ली जा रही। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह लापरवाही सीधे तौर पर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
भेल दशहरा मैदान- निगम के कर्मचारी ही कचरे में लगाते हैं आग
भेल दशहरा मैदान में स्थिति और भी अधिक गंभीर है। यहां अकसर नगर निगम के कर्मचारी ही कचरे में आग लगा देते हैं। इससे उठने वाला धुआं आसपास के रिहायशी इलाकों तक पहुंचता है। इससे बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्वास्थ्य पर असर साफ दिखने लगा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस पर चुप है।
इन अधिकारियों को सौंपी जोन की जिम्मेदारी
निगमायुक्त संस्कृति जैन ने शहर के सभी 21 जोन में आइएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ ही निगम के इंजीनियरों की ड्यूटी भी सफाई व्यवस्था के निरीक्षण के लिए लगाई है। इसमें अपर आयुक्त अंजू अरूण कुमार, तन्मय वशिष्ठ शर्मा, वरुण अवस्थी, मुकेश शर्मा के साथ ही उपायुक्त दिनेश सिंह, हीरेंद्र कुशवाह, सहायक आयुक्त कीर्ति चौहान शामिल हैं।
इसके अलावा प्रभारी अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग, आरआर जारोलिया, कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय, आरके त्रिवेदी, जेडए खान, ताराचंद पाठ्या, अनिल टटवाड़े, एके साहनी, एसके राजेश, आशीष श्रीवास्तव, आरके गोयल, अजय मालवीय, एनके डहेरिया और पशु चिकित्सक डॉ. पंकज कपूर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं इनके सहयोग के लिए सहायक यंत्री और उपयंत्रियों को भी जिम्मेदारी दी गई है।
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सवाल:- शहर में कई जगह अभी भी खुले में कचरा डाला जा रहा है, इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
जबाव:- शहर में सभी जगह से कचरा उठाने में सख्ती बरती जा रही है। कहीं पर कचरा खुले में डाला जा रहा है तो उसे भी दिखवाकर कचरा उठवाया जाएगा। लोगों को भी खुले में कचरा न डालने के लिए समझाइश दी जा रही है।
सवाल:- शहर में सफाई व्यवस्था देखने के लिए आपने अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है, लेकिन कई नोडल अधिकारी जोन में पहुंच ही नहीं रहे हैं?
जबाव:- अधिकारी तो फील्ड में जाकर सफाई व्यवस्था देख रहे हैं। कुछ नोडल अधिकारी हैं, जो जोन में नहीं जा रहे हैं तो उनकी कार्यप्रणाली पर हम नजर रखे हुए हैं। जिम्मेदारों पर आने वाले समय में कार्रवाई की जाएगी।
सवाल:- मैदानी अमला खुद कचरे में आग लगाकर जनता की सेहत बिगाड़ रहा है?
जबाव : नगर निगम के कोई कर्मचारी खुद कचरा जला रहे हैं तो हम उन्हें दिखवाते हैं और उससे जुड़े कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।