
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में बीटेक चतुर्थ सेमेस्टर (एआईएमएल) के प्रश्नपत्रों के नौ सीलबंद लिफाफे चोरी होने के मामले में गठित जांच समिति की प्रारंभिक जांच में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। समिति ने पाया कि परीक्षा से जुड़े अत्यंत गोपनीय प्रश्नपत्रों का बंडल ऐसे कक्ष में रखा गया था, जहां विद्यार्थियों और अन्य लोगों का नियमित आना-जाना रहता था।
जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. अर्चना तिवारी को उनके सभी अतिरिक्त दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया है। वहीं, उन्होंने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। समिति जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट कुलगुरु प्रो. आलोक शर्मा को सौंपेगी।
इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निर्णय लिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा कार्य से जुड़े संविदा संकाय सदस्यों और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
जांच समिति के अनुसार डॉ. अर्चना तिवारी के पास स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक के साथ यूटीडी परीक्षा नियंत्रक का भी प्रभार था। इसी कारण उन्होंने प्रश्नपत्रों को अपने विभाग के एक कक्ष में रखवाया था। जिस अलमारी में प्रश्नपत्र सुरक्षित रखे गए थे, वह परीक्षा शाखा के नाम से चिह्नित थी, लेकिन वह कक्ष सार्वजनिक उपयोग का था। उसी कक्ष में सेंट्रल लाइब्रेरियन का प्रभार संभाल रहे फैकल्टी सदस्य बैठते हैं, जिसके कारण लाइब्रेरी का नो-ड्यूज कराने सहित अन्य कार्यों के लिए विद्यार्थियों का वहां लगातार आना-जाना लगा रहता था।
समिति ने यह भी पाया कि जिस दराज में अलमारी की मुख्य चाबी रखी जाती थी, उसमें न तो ताला था और न ही सुरक्षित लॉकिंग व्यवस्था। विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा संबंधी गोपनीय सामग्री को सीसीटीवी निगरानी वाले स्ट्रांग रूम में रखा जाना चाहिए था, जहां केवल अधिकृत परीक्षा स्टाफ को ही प्रवेश की अनुमति हो।
प्रश्नपत्र चोरी मामले को लेकर मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विश्वविद्यालय परिसर में करीब पांच घंटे तक प्रदर्शन किया। परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
परिषद का कहना है कि केवल दायित्वों से मुक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिन अधिकारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए, ताकि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर सकें।