
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में 15 मंजिला से अधिक या 45 मीटर से ज्यादा ऊंचे बहुमंजिला भवनों (हाईराइज बिल्डिंग) को मंजूरी देने से पहले नगर निगम या नगरीय निकायों को एक विशेष साइट क्लीयरेंस कमेटी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा, जो केवल यह जांचेगी कि वह साइट ऊंची इमारत के लिए उपयुक्त है या नहीं। बिना लिखित पूर्व अनुमति के कोई भी भूमि विकास या पुनर्विकास नहीं किया जा सकेगा।
शादी के पंडाल या त्योहारों जैसे अस्थायी और आकस्मिक कार्यों के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। यह व्यवस्था मप्र एकीकृत भूमि विकास और भवन संवर्धन नियम-2026 के ड्राफ्ट में की गई है।
नए नियम के तहत लिफ्ट मालिकों को लिफ्ट का इंश्योरेंस करवाना होगा, हर छह माह में सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। टीएनसीपी द्वारा दी गई प्लानिंग डेवलपमेंट अनुमति अब तीन वर्षों के लिए वैध रहेगी, जिसे एक-एक वर्ष के लिए दो बार और बढ़ाया जा सकेगा। यानी पांच साल के भीतर निर्माण कार्य शुरू करना अनिवार्य होगा।
कोई निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत पाया जाता है, तो भवन अधिकारी काम रोक सकेगा व अवैध निर्माण को ढहा सकेगा। गलत जानकारी देकर अनुमति लेने वाले आर्किटेक्ट्स या इंजीनियरों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) भी किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले भवनों के बिजली, पानी और गैस कनेक्शन भी काटे जा सकेंगे।
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नए नियम में स्पष्ट किया गया है कि दो या अधिक सटे हुए प्लॉटों को आपस में मिलाया (मर्जर) जा सकता है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और कम आय वर्ग (एलआईजी) के प्लॉटों के मर्जर पर पूरी तरह रोक रहेगी।
आवासीय प्लॉट का किसी अन्य श्रेणी की खुली जमीन के साथ मर्जर प्रतिबंधित रहेगा। किसी प्लॉट के विभाजन (डिवीजन) के बाद बनने वाला कोई भी नया प्लॉट 500 वर्ग मीटर से कम का नहीं होना चाहिए। आवेदन मिलने पर नगर निगम, नगरीय निकाय द्वारा सात दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी कर आस-पड़ोस के लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी।