'सिंहस्थ में नहीं होगी दूध-दही की किल्लत': उज्जैन में लगेगा 3 लाख लीटर क्षमता वाला सांची का नया प्लांट, लागत होगी 250 करोड़ रुपये
सिंहस्थ के दौरान दूध की संभावित मांग को देखते हुए उज्जैन में सांची तीन लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया ऑटोमेटेड डेयरी प्लांट लगाएगा, जिसे मार्च 2028 त...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 05:53:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 05:53:35 PM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- सांची तीन लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का नया ऑटोमेटेड डेयरी प्लांट लगाएगा
- सिंहस्थ के दौरान दूध की संभावित मांग को देखते हुए उज्जैन में बनेगा प्लांट
- पहले चरण में करीब 170 करोड़ और विस्तार के लिए 80 करोड़ रुपये होंगे खर्च
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ के दौरान करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने के अनुमान के बीच दूध की मांग अचानक बढ़ने की संभावना है। अनुमान है कि इस दौरान वहां दूध की मांग करीब तीन लाख लीटर रोज तक पहुंच सकती है।
इसी संभावित मांग को देखते हुए सांची 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया ऑटोमेटेड डेयरी प्लांट तैयार करने का काम शुरू किया है। इस प्लांट का मार्च 2028 तक शुरू कर दिया जाना है।
250 करोड़ रुपये की परियोजना
अधिकारियों ने बताया कि पिछले सिंहस्थ के दौरान रोजाना 1.10 लाख लीटर दूध की जरूरत पड़ी थी। अब भीड़ की संभावना अधिक है, इसलिए क्षमता तैयार रखना जरूरी है। उज्जैन में मौजूद प्लांट की मौजूदा क्षमता करीब 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन की है।
नई जरूरत के लिए दूसरा प्लांट तैयार किया जा रहा है। इसके पहले चरण में करीब 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि बाद में विस्तार के लिए करीब 80 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे।
इस तरह परियोजना की कुल लागत करीब 250 करोड़ रुपये होगी। नई डेयरी शुरू होने के बाद पुरानी डेयरी को तत्काल बंद नहीं किया जाएगा। दोनों व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से चलाकर अतिरिक्त क्षमता विकसित की जाएगी।
300-350 मोबाइल बूथ लगाने की तैयारी
सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को दूध, दही और छाछ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 300 से 350 मोबाइल और अस्थायी बूथ लगाने की जरूरत बताई गई है। वर्तमान में उज्जैन में रोज करीब 2.15 लाख लीटर दूध का संकलन होता है, जबकि पैकेज्ड दूध की बिक्री करीब 50 हजार लीटर है।
एक आधुनिक डेयरी प्लांट को निर्माण से लेकर उत्पादन शुरू करने तक सामान्यतः करीब 18 महीने लगते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से उत्पादन शुरू होगा। समय पर फंड उपलब्ध होता रहा तो परियोजना मार्च 2028 तक तैयार हो जाएगी। - जयदेव बिस्वास, प्रबंध संचालक, एमपीसीडीएफ