• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Saurabh Sharma News: भोपाल में था सौरभ शर्मा की पत्नी दिव्या का क्लब… अब सोशल मीडिया से गायब हो रहा पूरा परिवार, साला भी फरार

मध्य प्रदेश के पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। महाभ्रष्टाचार को अंजाम देने के बाद सौरभ शर्मा फरार है। माना जा रहा ह...और पढ़ें

By Arvind DubeyEdited By: Arvind Dubey
Publish Date: Mon, 23 Dec 2024 11:53:30 AM (IST)Updated Date: Mon, 23 Dec 2024 11:54:29 AM (IST)
Saurabh Sharma News: भोपाल में था सौरभ शर्मा की पत्नी दिव्या का क्लब… अब सोशल मीडिया से गायब हो रहा पूरा परिवार, साला भी फरार
सौरभ शर्मा और उनकी पत्नी दिव्या (फाइल फोटो)

HighLights

  1. काले कारनामे उजागर होने के बाद एमपी में हड़कंप
  2. भाजपा सरकार पर हमलावर कांग्रेस, करेगी प्रदर्शन
  3. ग्वालियर में रहता था साला, रतलाम में उसकी ससुराल

नईदुनिया, ग्वालियर/भोपाल। काली कमाई का मालिक पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा का साला शुभम तिवारी भी ग्वालियर छोड़ गया है। शुभम फिलहाल कहां है, यह किसी को नहीं पता है।

पहले शुभम ने अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट किया, फिर पत्नी सहित जानने वालों का कराया और गायब हो गया है। शुभम और साैरभ के बीच काफी करीबी है और सौरभ के कारोबार में पत्नी दिव्या के साथ-साथ शुभम भी कई काम संभालता है।

पत्नी दिव्या का भोपाल में फिटनेस क्लब भी है, जिसका संचालन वो खुद देखती थी। सौरभ के यहां लोकायुक्त के छापे के बाद और फिर सौरभ के करीब चेतन सिंह की कार में सोना-कैश मिलने के बाद सौरभ की ससुराल वाले भी सतर्क हो गए थे। बताया गया है कि एक दिन पहले यहां से कुछ सामान भी बाहर निकलवाया गया।


naidunia_image

पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा… पढ़िए अब तक की पूरी कहानी

  • पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के यहां कुछ रोज पहले ही लोकायुक्त ने भोपाल निवास व कार्यालय पर छापा मारा था। सौरभ मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है।
  • जो गाड़ी आयकर की टीम ने पकड़ी, उसमें 54 किलो सोना व नौ करोड़ से ज्यादा नकद मिला था। यह गाड़ी सौरभ के नजदीकी चेतन सिंह गौर की थी। सौरभ की ग्वालियर के थाटीपुर में ससुराल है।
  • सोशल मीडिया पर पहले सौरभ व उसकी पत्नी दिव्या और इसके बाद एक एक करके सभी रिश्तेदार व नजदीकियों ने अपने फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर लिए हैं।

परिवहन महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा

सौरभ को लेकर परिवहन मुख्यालय से लेकर जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय तक में इन दिनों भारी चर्चा है। सौरभ शर्मा के कई जानने वाले कार्यालयों में पदस्थ हैं और दबी जुबान से अलग-अलग बातें कर रहे हैं।

विभाग के कुछ लोगों का कहना है कि सौरभ ने ग्वालियर में शुरुआत जरूर की, लेकिन इसके बाद भोपाल की ओर रुख करने में देर नहीं की। सौरभ के अलग-अलग कारोबारों में पार्टनर भी हैं। जिस तरह रोहित तिवारी व शरद जायसवाल पार्टनर हैं, उसमें एक मेहता भी सौरभ का काफी नजदीकी है।

शरद जायसवाल होटल फाटिगो भोपाल का भी काम देखता है। वहीं मेहता भी होटल से लेकर रियल स्टेट कारोबार में सौरभ का साथ देता है।

naidunia_image

यहां भी क्लिक करें - सौरभ शर्मा की स्पेशल-12, RTO की नौकरी छोड़ने के बाद नाकों पर वसूली के लिए बनाई टीम

सौरभ की नियुक्ति में पूर्व विधायक का बड़ा हाथ

इस बीच, परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की नियुक्ति नियम विरुद्ध बताई जा रही है। इसमें ग्वालियर अंचल के कांग्रेस से जुड़े एक कद्दावर नेता और पूर्व विधायक का बड़ा हाथ है। तत्कालीन कलेक्टर पर भोपाल तक से दबाव डलवाकर दो बार अनुकंपा नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव भिजवाया गया।

परिवहन आयुक्त के स्टेनो ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। आखिर सौरभ को यह लोग परिवहन विभाग में लाने में कामयाब हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री तक से पूर्व विधायक ने प्रदेश के मंत्रियों को सौरभ के लिए सिफारिश कराई थी।

यह पूर्व विधायक सौरभ के परिवार से सालों से जुड़े हैं। सौरभ की नियुक्ति होने के बाद उसे परिवहन विभाग के दांव-पेंच सीखते में अधिक समय नहीं लगा। दो साल तक भाजपा सरकार में उसने पूरे दांव-पेंच सीखकर परिवहन चेक पोस्टों का ठेका उठाया।

कांग्रेस सरकार में बढ़ गई थी पावर

फिर जैसे ही कांग्रेस सरकार आई, तो वह और अधिक पावर में आ गया। कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में परिवहन विभाग में कई बड़े अफसरों तक को वह दरकिनार करने लगा था। इसे लेकर उसका खूब विरोध हुआ था। विभाग के अंदर ही उसकी शिकायतें भी हुई थी।

आरटीआई की विभाग ने नहीं दी जानकारी

ग्वालियर के रहने वाले वकील अवधेश तोमर ने सौरभ शर्मा को दी गई अनुकंपा नियुक्ति में नियमों, दस्तावेजों की जानकारी के लिए आरटीआई लगाई। अवधेश बताते हैं कि बार-बार आवेदन लगाने के बाद भी विभाग ने उन्हें जानकारी दी।

उनका कहना है कि सौरभ का भाई सचिन सरकारी नौकरी में है। वह छत्तीसगढ़ में डिप्टी डायरेक्टर फायनेंस के पद पर पदस्थ है, इसलिए सौरभ को नौकरी मिल ही नहीं सकती थी। यही वजह है- उसकी नियुक्ति नियम विरुद्ध है।

यहां भी क्लिक करें - सौरभ शर्मा को अनुकंपा से मिली थी RTO में नौकरी… पढ़िए भ्रष्टाचार का साम्राज्य खड़ा करने की पूरी कहानी