PMO तक पहुंची पेंच टाइगर रिजर्व में अवैध शिकार की गूंज; माफिया को रोकने के लिए मांगी गई मोटरबोट और विशेष बल
पेंच टाइगर रिजर्व में मछली माफिया पर शिकंजे कसने के लिए एसडीआरएफ और विशेष सुरक्षा बल की तैनाती का सुझाव दिया गया है।
Publish Date: Sat, 15 Aug 2026 02:26:24 PM (IST)Updated Date: Sat, 15 Aug 2026 02:26:24 PM (IST)
पेंच टाइगर रिजर्व, मप्र। फाइल फोटो।HighLights
- पेंच टाइगर रिजर्व में मछली माफिया पर शिकंजे की तैयारी
- एसडीआरएफ और विशेष सुरक्षा बल की तैनाती का सुझाव
- पीएमओ में शिकायत के बाद एनटीसीए सक्रिय
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। पेंच टाइगर रिजर्व के तोतलाडोह जलाशय में सक्रिय मछली माफिया जलीय जीवों के साथ वन्य प्राणियों की सुरक्षा में भी चुनौती बना हुआ है। यहां सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद डायनामाइट और अवैध तरीकों से मछली के शिकार की शिकायतें मिली हैं।
बताया गया कि संगठित गिरोह द्वारा मारी गईं मछलियां को छिंदवाड़ा और सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र के बाजारों में सप्लाई करता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर मध्य प्रदेश सरकार ने इस संबंध में वन बल प्रमुख से पूरी रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल, पेंच प्रबंधन और वन विभाग, माफिया के हिंसक हमलों को देखते हुए अकेले पेट्रोलिंग करने में लाचारी महसूस कर रहा है। इसके लिए जवाब में विशेष सुरक्षा बलों और राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की तैनाती व ज्वाइंट पेट्रोलिंग की कार्ययोजना को शामिल किया गया है। इसमें फोर्स की मांग की गई है, जो मोटरबोट चलाने और तैराकी में माहिर हो।
पीएमओ से शिकायत के बाद एनटीसीए ने मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित तोतलाडोह बांध 76 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। 56 वर्ग किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश में और 20 वर्ग किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में आता है।
यहां वर्षों से हो रहे मछलियों के अवैध शिकार की शिकायत कैप्टन ब्रजेश भारद्धाज ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में की है, जिसके बाद एनटीसीए ने मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल पार्क प्रबंधन द्वारा यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
वन अमले को भगाने करते हैं विस्फोट
वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि शिकारियों द्वारा विस्फोट कर मछली के शिकार का तथ्य सही नहीं है। वह वन अमले को भगाने के लिए पेट्रोल बम आदि विस्फोटक का उपयोग करते हैं।
मछली माफिया हथियारों से युक्त रहता है, लेकिन वन अमले को हथियार चलाने का अधिकार नहीं है। पहले भी पुलिस बल और सशस्त्र बल की मांग की गई लेकिन उपलब्ध नहीं कराया गया।
मोटरबोट और प्रशिक्षित अमले की मांग
पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक ने सरकार से 70 मोटरबोट और गोताखोरों की मांग की है। बताया कि मछली माफिया मूलत: नाविक होते हैं। पेट्रोलिंग के दौरान कई बार उनके द्वारा वन अमले की मोटरबोट को डूबोने का प्रयास भी किया जाता है।
यह प्रशिक्षित अमला एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के पास ही होता है। ऐसे में डीजी होमगार्ड को पत्र लिखा गया है।
हमने शासन से फोर्स मांगी है, जो तैराकी और मोटरबोट चलाने में सक्षम हो, अभी तक फोर्स नहीं मिली। वैसे तोतलाडोह बांध में मछली के अवैध शिकार का मामला नया नहीं है। -सुभरंजन सेन, वन बल प्रमुख, मप्र वन
समय-समय पर हम वन विभाग को एसडीआरएफ उपलब्ध कराते रहे हैं। वर्तमान में स्थायी रूप से बल उपलब्ध कराने की स्थिति नहीं है। नई भर्तियां की जा रही हैं, पर्याप्त बल होने पर वन विभाग को देने पर विचार करेंगे।- प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव, डीजी, मप्र होमगार्ड