
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कभी चिह्नित शासकीय अस्पतालों में डॉक्टरों की तरफ से बोली लगवाकर उन्हें वेतन देने का प्रस्ताव दिया गया तो कभी वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से तत्काल नियुक्ति के ऑफर दिए गए। इसके बावजूद स्थिति यह है कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
कुल 5086 स्वीकृत पदों में 2579 ही कार्यरत हैं। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के तो 59 प्रतिशत पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
अब सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए एक और प्रयोग करने जा रही है। अभी चिह्नित दूरस्थ अस्पतालों में पदस्थ होने वाले डॉक्टरों को सुषेण भत्ता योजना के तहत प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अब इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। इसमें ऐसे अस्पतालों को भी शामिल किया जाएगा, जो भले ही दूरस्थ क्षेत्रों में नहीं हैं, लेकिन वहां सीजेरियन डिलीवरी की सुविधा शुरू की जा सकती है। इसका प्रस्ताव शीघ्र ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
प्रदेश में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों को मिलाकर मात्र 108 अस्पताल ही हैं जहां सीजर डिलीवरी की सुविधा है। प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 35 प्रति हजार है। प्रति हजार जीवित जन्म पर एक वर्ष के भीतर 35 शिशुओं की मृत्यु हो जा रही है। इसे कम करने के लिए आवश्यकता पर यथाशीघ्र ऑपरेशन करना आवश्यक होता है।
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गैर दूरस्थ क्षेत्र के अस्पतालों में पदस्थ होने वाले विशेषज्ञों को सुषेण भत्ता देकर सरकार उन्हें आकर्षित करना चाहती है। बता दें कि इसमें अन्य डॉक्टरों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत वेतन भत्ते अतिरिक्त मिलते हैं। इसके पहले सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों के 25 प्रतिशत पद सीधे भरने की व्यवस्था प्रारंभ की गई, पर विशेष लाभ नहीं दिखा।
इस संबंध में उप मुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज इसीलिए खोले जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों की कमी दूर की जा सके। अन्य प्रावधान भी उनके हित में कर रहे हैं।