
डिजिटल डेस्क। भोपाल के शाहपुरा तालाब की वास्तविक सीमा और उसके सुरक्षित क्षेत्र (बफर जोन) को लेकर सरकारी विभागों में चल रही टालमटोल पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है।
एनजीटी ने एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और नगर निगम को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि वे 10 दिन के भीतर मिलकर तालाब की फुल टैंक लेवल (एफटीएल) सीमा और बफर जोन तय करें। ट्रिब्यूनल ने कोर्ट में बिना पूरी तैयारी के पहुंचे एसडीएम को कड़ी फटकार भी लगाई।
बीती 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई में एसडीएम कोलार सीमांकन की स्थिति स्पष्ट करने पहुंचे थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जल संसाधन विभाग अपने रिकॉर्ड नगर निगम को दे चुका है और अब एफटीएल व अन्य सीमाएं निगम को ही तय करनी हैं। इस पर एनजीटी ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों को एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले को लटकाना और कोर्ट का समय बर्बाद करना बंद करना चाहिए। कोर्ट ने एसडीएम को अगली सुनवाई में पूरी तैयारी के साथ आने की हिदायत दी।
यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि तहसीलदार की ओर से पेश रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2017-18 के बाद से तालाब के आसपास कोई अतिक्रमण नहीं हुआ है। इसके उलट, नगर निगम द्वारा 24 जुलाई को कराए गए ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग में कैचमेंट एरिया के भीतर कई पक्के और अस्थायी निर्माण नजर आ रहे हैं। एनजीटी ने अब स्पष्ट किया है कि पहले तालाब की सीमा और बफर जोन का संयुक्त रूप से निर्धारण होगा, जिसके बाद सुरक्षित क्षेत्र में आने वाले कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
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