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शाहपुरा तालाब की सीमा-बफर जोन पर NGT सख्त, 10 दिन में सीमांकन के निर्देश; ड्रोन सर्वे में कई निर्माण मिले

एनजीटी ने शाहपुरा तालाब की एफटीएल सीमा और बफर जोन 10 दिन में तय करने के निर्देश दिए। ड्रोन सर्वे में निर्माण मिले, अब कब्जे हटाने की तैयारी होगी।

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 03:13:03 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 03:13:03 PM (IST)
शाहपुरा तालाब की सीमा-बफर जोन पर NGT सख्त, 10 दिन में सीमांकन के निर्देश; ड्रोन सर्वे में कई निर्माण मिले
शाहपुरा तालाब की सीमा-बफर जोन पर NGT सख्त। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एनजीटी ने शाहपुरा तालाब की एफटीएल सीमा तय करने कहा।
  2. दस दिन में बफर जोन का संयुक्त सीमांकन करना होगा।
  3. ड्रोन सर्वे में कैचमेंट क्षेत्र में कई निर्माण मिले।

डिजिटल डेस्क। भोपाल के शाहपुरा तालाब की वास्तविक सीमा और उसके सुरक्षित क्षेत्र (बफर जोन) को लेकर सरकारी विभागों में चल रही टालमटोल पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है।

एनजीटी ने एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और नगर निगम को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि वे 10 दिन के भीतर मिलकर तालाब की फुल टैंक लेवल (एफटीएल) सीमा और बफर जोन तय करें। ट्रिब्यूनल ने कोर्ट में बिना पूरी तैयारी के पहुंचे एसडीएम को कड़ी फटकार भी लगाई।

एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपना बंद करें अधिकारी

बीती 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई में एसडीएम कोलार सीमांकन की स्थिति स्पष्ट करने पहुंचे थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जल संसाधन विभाग अपने रिकॉर्ड नगर निगम को दे चुका है और अब एफटीएल व अन्य सीमाएं निगम को ही तय करनी हैं। इस पर एनजीटी ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों को एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले को लटकाना और कोर्ट का समय बर्बाद करना बंद करना चाहिए। कोर्ट ने एसडीएम को अगली सुनवाई में पूरी तैयारी के साथ आने की हिदायत दी।


ड्रोन सर्वे और तहसीलदार की रिपोर्ट में विरोधाभास

यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि तहसीलदार की ओर से पेश रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2017-18 के बाद से तालाब के आसपास कोई अतिक्रमण नहीं हुआ है। इसके उलट, नगर निगम द्वारा 24 जुलाई को कराए गए ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग में कैचमेंट एरिया के भीतर कई पक्के और अस्थायी निर्माण नजर आ रहे हैं। एनजीटी ने अब स्पष्ट किया है कि पहले तालाब की सीमा और बफर जोन का संयुक्त रूप से निर्धारण होगा, जिसके बाद सुरक्षित क्षेत्र में आने वाले कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

30 अक्टूबर को देना होगा कार्रवाई का हिसाब

  • सरकारी रिकॉर्ड में शाहपुरा तालाब का क्षेत्रफल 47.22 हेक्टेयर है और इसे एक वेटलैंड के रूप में मैप किया गया है, इसलिए यहां वेटलैंड संरक्षण के नियम प्रभावी हैं। मामले में याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने दलील दी कि तालाब में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है और बफर क्षेत्र में अवैध कब्जे हो चुके हैं।

  • न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एसके सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को मुकर्रर की है। प्रशासन को तब तक यह बताना होगा कि सीमांकन और कब्जे हटाने की दिशा में उन्होंने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
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