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SIR in MP: मप्र के पांच जिलों में 2003 की सूची से नहीं हो पा रहा मिलान, अब देना होगा 12 में से कोई एक दस्तावेज

न तो मतदाता और न ही मतदाता के रिश्तेदार का नाम का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान हो पा रहा है। अब इन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य किए गए पहच...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sun, 30 Nov 2025 06:26:38 AM (IST)Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 06:35:45 AM (IST)
SIR in MP: मप्र के पांच जिलों में 2003 की सूची से नहीं हो पा रहा मिलान, अब देना होगा 12 में से कोई एक दस्तावेज
मध्‍य प्रदेश में जारी है एसआईआर सर्वे का काम।

HighLights

  1. शहडोल में सर्वाधिक 17 प्रतिशत 'नो मैपिंग', 2003 की सूची से मिलान नहीं।
  2. मिलान नहीं होने वाले मतदाताओं को देना होगा 12 में से कोई एक दस्तावेज।
  3. कई जिले ऐसे भी है कि 95 प्रतिशत से अधिक डाटा मिलान हो गया गया है।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में पांच जिले ऐसे हैं जहां 10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो पाई है। यानी न तो मतदाता और न ही मतदाता के रिश्तेदार का नाम का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान हो पा रहा है। अब इन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य किए गए पहचान के 12 दस्तावेज में से कोई एक देना होगा। ऐसे सबसे अधिक मामले शहडोल में 17 प्रतिशत, सतना में 15, मैहर में 10, मुरैना और जबलपुर में 11-11 प्रतिशत हैं।

यह आंकड़ा जिलों में कुल डिजिटाइजेशन में से है। इसके उलट, कई जिले ऐसे भी है कि 95 प्रतिशत से अधिक डाटा मिलान हो गया गया है। यानी यहां अब पांच प्रतिशत से कम मतदाताओं के ही नाम कटने का जोखिम है। वह भी तब जब वे पहचान के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य किए गए 12 दस्तावेजों में से कोई एक अपनी पहचान के लिए नहीं दे पाएंगे।


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उदाहरण के तौर पर दमोह को लें तो यहां 27,986 यानी 2.82 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, या यह कहें कि जिन्होंने अभी तक गणना पत्रक (एसआइआर फार्म) जमा किए हैं उनमें लगभग 97 प्रतिशत का मिलान हो चुका है। रतलाम में नौ मैपिंग का प्रतिशत 2.88 है।

बड़वानी में मात्र 1.7 प्रतिशत है। हालांकि, प्रदेश का औसत सात प्रतिशत है। अशोकनगर जिले में दो दिन पहले ही डिजिटाइजेशन का काम सौ प्रतिशत हो गया है, यानी सभी मतदाताओं का गणना पत्रक भरा जा चुका है, पर यहां भी सात प्रतिशत का मिलान नहीं हो पाया है।

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यहां, शुरू से ही गणना पत्रक भरने और भरवाने की गति अच्छी रही। दिन में चार बार समीक्षा की जा रही थी। कमियां पता कर दूर किया गया, जिससे सौ प्रतिशत डिजटाइजेशन हो पाया।

जिनका नाम मैप नहीं हो पाया है उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। निर्वाचन आयोग की तरफ से निर्धारित तारीख में संबंधित मतदाताओं को सूचना देकर कोई एक मान्य दस्तावेज देने के लिए कहा जाएगा, जिससे उनका नाम सूची में शामिल हो जाएगा।

आरपीएस जादौन, अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र।