
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल में मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए एसआइआर (SIR) प्रक्रिया के तहत 'नो मैपिंग' श्रेणी में आए मतदाताओं की सुनवाई तेज कर दी गई है। जिले के सभी वार्ड कार्यालयों, एसडीएम और तहसील स्तर पर कुल 85 हेल्प डेस्क बनाई गई हैं। यहाँ उन 1,16,925 मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जिनका स्वयं का या उनके परिजनों का रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल पाया था।
सुनवाई के दौरान दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नयाबसेरा की निवासी सुनीता यादव का मामला सामने आया। सुनीता ने बताया कि उनके पति का नाम तो मैप हो गया था, लेकिन उन्हें 'नो मैपिंग' का नोटिस थमाया गया। उनकी दो बहनें प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में रहती हैं, जिनकी मैपिंग पिता के 2003 के डाटा से हो चुकी थी। गुरुवार को शास्त्री नगर सामुदायिक भवन स्थित हेल्प डेस्क पर सुनीता ने अपने पिता के 2003 के रिकॉर्ड पेश किए, जिसके आधार पर बीएलओ ने उनकी मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की।
प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, जिले में तैनात 90 एईआरओ (सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी) को प्रतिदिन 50 मतदाताओं की सुनवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह एक दिन में साढ़े चार हजार मतदाताओं के दावों का निराकरण किया जा रहा है। अब तक जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों (बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर) में कुल 75,639 नोटिस वितरित किए जा चुके हैं और 8,120 मतदाताओं की सुनवाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।
मतदाता सूची में सुधार के लिए लोग बड़ी संख्या में आवेदन कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं को रिकॉर्ड से जोड़ना है जो मैपिंग न होने के कारण सूची से बाहर हो सकते थे।
नो मेपिंग मतदाताओं के लिए बीएलओ एप में मैपिंग का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। यदि पूर्व में नोमेप सूची में दर्ज मतदाता को विगत SIR 2003 का डाटा मिल जाता है, तो बीएलओ उसे मैप कर सकते हैं। ऐसे मतदाताओं को किसी अन्य दस्तावेज पेश करने या नोटिस, सुनवाई की आवश्यकता नहीं है- भुवन गुप्ता, उप जिला निर्वाचन अधिकारी।