
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 212 हितग्राहियों के खाते में बैंक के ही दो कर्मचारियों ने सेंध लगा दी। हितग्राहियों के निष्क्रिय खातों को धोखाधड़ी कर उन्होंने सक्रिय कर लिया। इसके बाद इन खातों में जमा राशि में 44 लाख रुपये अपने परिचितों के खाते में स्थानांतरित कर दिए। बाद में यह राशि एटीएम व अन्य तरीके से निकाल ली गई। भोपाल में बैंक ऑफ इंडिया की 7 शाखाओं में पिछले तीन वर्ष के भीतर यह गड़बड़ी की गई है।
बैंक ऑफ इंडिया भोपाल जोन की शिकायत की जांच के बाद मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बैंक के कर्मचारी दीपक जैन व अजय सिंह परिहार सहित सात आरोपितों के विरुद्ध मंगलवार को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण कायम किया है।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि गबन की राशि आरोपितों से वसूली जा चुकी है। वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन सहित कई योजनाओं की राशि इन खातों में जमा होती थी। इन योजनाओं में राशि एक हजार रुपये प्रतिमाह से भी कम है। दूसरा, कुछ हितग्राही बुजुर्ग या दिव्यांग हैं। इस कारण वह राशि नहीं निकाल रहे थे। इस तरह खातों में पांच से 10 हजार रुपये तक जमा हो गए थे। इन खातों में मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं थे। आरोपितों की लगा कि इन खातों की कोई पूछ परख नहीं हो रही है तो सेंध लगा दी।
यह गड़बड़ी कैटेगराइज्ड मार्केट ब्रांच, हमीदिया रोड, एमपी नगर, भेल एरिया, प्रोफेसर्स कालोनी, सैफिया कॉलेज सहित सात से अधिक बैंक शाखाओं के खातों में की गई है। ईओडब्ल्यू ने दीपक जैन, अजय सिंह परिहार, खुशबू खान, अफरोज खान, ललिता ठाकुर, कल्पना जैन, हेमलता जैन तथा अन्य संभावित सह-आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश सहित आइपीसी की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण कायम किया है।
आरोपितों ने फिनैकल सिस्टम की अपनी लॉगिन आईडी तथा अन्य कर्मचारियों की आईडी का दुरुपयोग कर निष्क्रिय (डॉरमैंट) खातों को अवैध रूप से सक्रिय किया। खातों को एक्टिव करने के लिए दीपक और अजय बैंक नियमों के विपरीत प्रस्तावक और अनुमोदक बन गए। मामला ऐसे खुला कि 18 मार्च 2019 को सैफिया कॉलेज शाखा में एक महिला भगवती देवी ने अपने मृत पति के खाते से अवैध निकासी की शिकायत की। शाखा प्रबंधक द्वारा आंतरिक जांच में पता चला कि लेनदेन अजय सिंह परिहार एवं दीपक जैन द्वारा किया गया है।
यह भी पढ़ें- Indore: भारत में अवैध रूप से रह रहे पति को वापस पाने कोर्ट पहुंची पाकिस्तानी युवती
इसके बाद बैंक की विजिलेंस यूनिट एवं विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर की गई अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच के दौरान फिनैकल लॉग, ट्रांजैक्शन रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, एटीएम निकासी विवरण, ऑडिट ट्रेल एवं विभिन्न शाखाओं के रिकॉर्ड से गड़बड़ी की परतें खुलीं। 64 खाते दीपक जैन ने स्वयं अपने सहकर्मियों की आईडी का दुरुपयोग कर सक्रिय किए। अधिकारियों के अनुसार 70 प्रतिशत राशि दोनों बैंक कर्मी अपने पास रखते थे और 30 प्रतिशत उन खाता धारकों को देते थे, जिनके खाते में राशि स्थानांतरित की जा रही थी।