• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

MP News:अब बिना सोइल और ग्राउंड वॉटर टेस्टिंग के नहीं बनेगी हाईराइज बिल्डिंग, जानें नए नियम

मध्य प्रदेश में 15 मंजिल से अधिक या 45 मीटर से ऊंचे भवनों के लिए जियोटेक्निकल लैब से मिट्टी की भार वहन क्षमता, संरचना और भूजल स्तर की जांच करानी होगी। सोइल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की अनुमति मिलेगी।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 12:27:30 PM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 12:27:30 PM (IST)
  • को पसंदीदा स्रोत बनाएं preferred source google
MP News:अब बिना सोइल और ग्राउंड वॉटर टेस्टिंग के नहीं बनेगी हाईराइज बिल्डिंग, जानें नए नियम
प्रतीकात्मक फोटो, एआई से तैयार

HighLights

  1. हाईराइज भवनों की मंजूरी से पहले मिट्टी की जांच अनिवार्य
  2. साइट क्लीयरेंस कमेटी करेगी तकनीकी और भौगोलिक जांच
  3. 10 साल अनुभवी विशेषज्ञों को मिलेगी जिम्मेदारी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। बहुमंजिला भवनों को मंजूरी देने से पहले जियोटेक्निकल लैब से मिट्टी की भार वहन क्षमता, मिट्टी की संरचना और भूजल स्तर का परीक्षण कराया जाएगा। सोइल स्टेबिलिटी रिपोर्ट (मिट्टी की मजबूती की जांच) रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य होगा।

रिपोर्ट में यदि सब कुछ ठीक रहा तभी साइट क्लीयरेंस कमेटी इसकी मंजूरी देगी। मिट्टी की कठोरता और गहराई के विश्लेषण के आधार पर ही ढांचे का डिजाइन तैयार किया जाएगा, ताकि भूकंप या भारी वजन से इमारत न धंसे।


खतरों से बचाव के लिए नियमों में बदलाव

कमजोर सतह या मिट्टी के कारण होने वाले खतरों को रोकने और भवनों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए मप्र एकीकृत भूमि विकास और भवन प्रोत्साहन नियम, 2026 के प्रारूप में इसके प्रावधान किए गए हैं। नियम में प्रावधान किया है कि किसी भी हाईराइज बिल्डिंग (15 मंजिल से अधिक या 45 मीटर से ऊंचे भवन) को तब तक मंजूरी नहीं दी जा सकती, जब तक कि साइट क्लीयरेंस कमेटी द्वारा स्पष्ट मंजूरी न दे दी जाए।

कमेटी देगी रिपोर्ट

यह कमेटी विशेष रूप से यह जांच करेगी कि प्रस्तावित स्थल हाईराइज भवन के निर्माण के लिए तकनीकी और भौगोलिक रूप से उपयुक्त है या नहीं। कमेटी यह भी देखेगी कि प्रस्तावित निर्माण स्थल किसी फाल्ट लाइन, अत्यधिक जलभराव वाले क्षेत्र, कमजोर ढलान या नदी/नाले के कैचमेंट एरिया के करीब तो नहीं है।

बहुमंजिला भवन का भारी वजन आसपास की जमीनों या भूमिगत बुनियादी ढांचे (जैसे मेट्रो टनल, गैस पाइपलाइन या मुख्य सीवर लाइन) की सतह को प्रभावित न करे, इसकी समीक्षा भी यह कमेटी करेगी।

यह भी पढ़ें- MP के 8 पिछड़े जिलों की बदलेगी तस्वीर: खुलेंगे 61 ड्राइविंग स्कूल, स्क्रैपिंग और व्हीकल फिटनेस सेंटर; केंद्र सरकार देगी मदद

नेशनल बिल्डिंग कोड का पालन होगा अनिवार्य

भवन निर्माण में नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) के मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। एनबीसी में मिट्टी की जांच, जियोटेक्निकल सर्वे और विभिन्न प्रकार की सतहों के लिए विस्तृत मानक दिए गए हैं। इसमें अधिकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर की जवाबदेही भी तय की गई।

जांच और अनुमति देने का अधिकार केवल उन्हीं अधिकृत आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियरों को होगा जिन्हें कम से कम 10 वर्ष का कार्य अनुभव प्राप्त हो। यदि तकनीकी मानकों (जैसे सोइल टेस्टिंग या स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी) की अनदेखी की जाती है या जो गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।