
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब नौ साल से बंद छात्र संघ चुनाव को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सरकार हाई कोर्ट में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सितंबर में चुनाव कराने का आश्वासन दे चुकी है, लेकिन चुनाव होंगे या नहीं और यदि होंगे तो किस प्रक्रिया के तहत कराए जाएंगे, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव का रोडमैप तैयार करने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति की अनुशंसा के आधार पर सरकार आगे का निर्णय लेगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 12 सितंबर को गठित समिति का संयोजक उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज को बनाया गया है। समिति को 15 दिन के भीतर अपनी अनुशंसाएं विभाग को सौंपनी हैं। इसके बाद चुनाव की तारीख, प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार निर्णय करेगी।
शैक्षणिक कैलेंडर में भी सितंबर माह में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ गठन का उल्लेख किया गया है, लेकिन सितंबर में होना संभव नहीं दिख रहा है। बता दें कि प्रदेश में इससे पहले वर्ष 2017 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। इसके बाद चुनाव नहीं कराए गए।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव कराने में सबसे बड़ी चुनौती कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अकादमिक सत्र के पीछे चलने को माना जा रहा है। कुछ संस्थानों में परीक्षाएं और परिणाम लंबित हैं। चुनाव प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ माह लगने की स्थिति में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। इस कारण इस साल चुनाव होना संभव नहीं दिख रहा है।
प्राचार्यों का कहना है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर पर अलग-अलग परीक्षा प्रणालियां लागू हैं। पीजी स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित हैं, जबकि यूजी स्तर पर वार्षिक प्रणाली के तहत परीक्षाएं मार्च से मई के बीच होती हैं। कॉलेज प्रबंधन इसी अंतर को चुनाव प्रक्रिया के लिए चुनौती मान रहे हैं।
इधर, छात्र संघ चुनाव की संभावना को देखते हुए छात्र संगठन सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI और ABVP ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। एनएसयूआई की ओर से जिलेवार प्रभारियों की नियुक्ति भी की गई है। अब सभी की नजर समिति की अनुशंसा और उसके आधार पर सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी है। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन का कहना है कि छात्र संघ चुनाव को लेकर छह सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति की अनुशंसा मिलने के बाद शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।
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