नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में खान-पान की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन शुक्रवार की कार्रवाई ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों की जांच के दौरान तीन मामलों में खराब या अनधिकृत खाद्य सामग्री मिली।
इनमें एक ट्रेन में उबले आलू खराब स्थिति में पाए गए, जबकि दूसरी कार्रवाई में अनधिकृत पैकिंग वाली पानी की बोतल और बिना स्वीकृति वाले ब्रांड का दूध मिला।
जांच के दावों पर सवाल
रेलवे की ओर से बताया गया है कि स्टेशन पर सीएचआई द्वारा महीने में 3-4 बार खान-पान की जांच की जाती है। खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाते हैं और रिपोर्ट करीब 8 से 10 दिन में आती है।
आईआरसीटीसी की क्विक रिस्पांस टीम भी स्टेशनों और ट्रेनों में समय-समय पर जांच करती है। जिसमें प्रतिदिन करीब 10-12 अवैध वेंडरिंग के मामले सामने आते हैं। ऐसे में सवाल है कि नियमित जांच के बावजूद अनधिकृत और संदिग्ध खाद्य सामग्री ट्रेनों तक कैसे पहुंच रही है।
शुक्रवार की कार्रवाई में सामने आए तीन मामले
- केस-1 : ट्रेन नंबर 20497 में खराब उबले आलू मिले
भोपाल स्टेशन पर गाड़ी संख्या 20497 की जांच के दौरान उबले हुए आलू खराब स्थिति में पाए गए। टीम ने उन्हें तत्काल नष्ट कर दिया।
- केस-2 : ट्रेन नंबर 12533 में मिली अनधिकृत पैकिंग की पानी बोतल
गाड़ी संख्या 12533 के निरीक्षण के दौरान अनधिकृत पैकिंग वाली पानी की बोतल मिली। ट्रेन भोपाल स्टेशन से रवाना हो चुकी थी। टीम ने कार्रवाई करते हुए इसे जब्त किया।
- केस-3 : ट्रेन नंबर 12533 में अनधिकृत ब्रांड का दूध पाया गया
गाड़ी संख्या 12533 में बिना स्वीकृति वाले ब्रांड का दूध मिला। एक छोटी पेटी में एक-एक लीटर की चार पैकिंग थीं। क्विक रिस्पांस टीम ने इसे भोपाल स्टेशन पर उतार लिया।
रेलवे में खाद्य सुरक्षा के प्रमुख प्रावधान
- खान-पान इकाइयों की नियमित और औचक जांच।
- खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच और सैंपलिंग।
- कैटरिंग इकाइयों के लिए एफएसएसएआई नियमों का पालन।
- फूड सेफ्टी सुपरवाइजर की व्यवस्था।
- पेंट्रीकार और बेस किचन का थर्ड पार्टी ऑडिट।
- बेस किचन में भोजन तैयार होने की प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी।
- पैक्ड खाद्य सामग्री पर क्यूआर कोड और पैकेजिंग की जानकारी।
- यात्रियों की शिकायतों के लिए शिकायत और हेल्पलाइन व्यवस्था।
सवाल यह है कि यदि जांच लगातार हो रही है, तो ऐसे खाद्य पदार्थ ट्रेनों और स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही क्यों नहीं पकड़े जा रहे हैं? इससे निगरानी की आवृत्ति, जांच की प्रभावशीलता और कार्रवाई के बाद दोबारा ऐसी सामग्री की रोकथाम पर भी सवाल खड़े होते हैं।