
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। स्वाइन फ्लू से इस वर्ष अभी तक 400 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं, जिनमें चार की मृत्यु हो गई है। 1400 सैंपलों की जांच में इतने पाजिटिव मिले हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वायरस का कोई नया वैरिएंट नहीं मिला है। अभी तक सबसे अधिक रोगी इंदौर में मिले हैं। यह संख्या 250 से अधिक है। इसके बाद 69 रोगी भोपाल में मिल चुके हैं। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और देवास में एक-एक रोगी की मृत्यु भी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया स्वाइन फ्लू के वायरस एच 1 एन 1 की जीनोम सीक्वेंसिंग समय-समय पर कराई जा रही है, पर अभी तक कोई नया वैरिएंट (स्ट्रेन) नहीं मिला है। सब पुराने हैं, जिनके प्रति लोगों में प्रतिरोधक क्षमता बन चुकी है। उनका कहना है कि जिन लोगों को दूसरी बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर है या किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके हैं, ऐसे लोगों में बीमारी के गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है।
ऐसे में बी-कैटेगरी जिन्हें भर्ती करने की आवश्यकता नहीं होती, सांस लेने में तकलीफ नहीं है, के सैंपल लेने के लिए भी निर्देश दिए हैं। पिछले वर्ष तक सी श्रेणी यानी गंभीर लक्षण वाले रोगियों के ही सैंपल लिए जा रहे थे। यही वजह है कि वर्ष 2025 में जनवरी से 30 सितंबर तक मात्र सात रोगी ही मिले थे। किसी की मौत नहीं हुई थी।
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पिछले सालों के आंकड़े देखें तो स्वाइन फ्लू सबसे खतरनाक वर्ष 2019 में हुआ था, जब 720 लोग पाजिटिव मिले थे, जिनमें 120 की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद सर्वाधिक 154 संक्रमित वर्ष 2024 में मिले थे, जिसमें एक की मृत्यु हो गई थी। यानी, 2019 के बाद संक्रमित होने वाले सर्वाधिक लोग इसी वर्ष हैं। बता दें कि इस बीमारी से पीड़ित को सर्दी-जुकाम, ठंड के साथ तेज बुखार होता है। फेफड़े में संक्रमण बढ़ने पर निमोनिया होने से बीमारी खतरनाक हो जाती है।