MP में 27 सितंबर से शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना; TET और ई-अटेंडेंस हटाने समेत 3 मांगों पर आर-पार की लड़ाई
मध्य प्रदेश अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 27 सितंबर से राजधानी के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है।
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 09:49:52 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 09:49:52 PM (IST)
प्रतीकात्मक फोटो, एआई की मदद से तैयार की गई है।HighLights
- 27 सितंबर से नीलम पार्क में शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना
- टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने सहित तीन प्रमुख मुद्दों पर प्रदर्शन
- 2 अक्टूबर को विशेष उपवास, समाधान न हाेने तक आंदोलन रहेगा जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समेत तीन प्रमुख मांगों को लेकर अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 27 सितंबर से राजधानी के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है।
मोर्चे का कहना है कि प्रदेश स्तरीय बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई है और मांगों का निराकरण होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।
आंदोलन की रणनीति तैयार
संगठनों का कहना है कि शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों से कई बार चर्चा के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ है। मोर्चे ने भोपाल में धरने को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की रूपरेखा बनाई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार 27 सितंबर से अलग-अलग संभागों के शिक्षक इसमें शामिल होंगे।
2 अक्टूबर को विशेष उपवास कार्यक्रम और 3 अक्टूबर तक विभिन्न संभागों की भागीदारी का कार्यक्रम है। मोर्चे ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कर तीनों मांगों पर सीधी चर्चा की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकार से समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करना है। इसके लिए मोर्चे ने तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करने और उसे केंद्र सरकार को भेजने की मांग रखी है।मोर्चे में शामिल संगठनों ने टीईटी के आवेदन नहीं भरने का सामूहिक निर्णय भी लिया है।
प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना और ई-अटेंडेंस का विरोध
मोर्चे की दूसरी मांग प्रथम नियुक्ति की तारीख से सेवा अवधि और वरिष्ठता की गणना करने की है, ताकि ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, पेंशन सहित सेवानिवृत्ति लाभों में उसका लाभ मिल सके। तीसरी मांग शिक्षकों पर लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त करने की है।