MP के शिक्षकों का भोपाल में डेरा: TET की अनिवार्यता का विरोध ,बोले- 'जब जनप्रतिनिधियों को पेंशन, तो शिक्षक वंचित क्यों?'
प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों ने भोपाल में धरना देकर कहा कि वे दोबारा टीईटी नहीं देंगे और सरकार से अनिवार्यता वापस लेने की मांग की।
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 04:37:29 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 04:37:29 PM (IST)
प्रदेशभर के शिक्षक राजधानी भोपाल में सड़कों पर उतर आए। सौ- आयोजकHighLights
- प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों ने भोपाल में धरना
- टीईटी की अनिवार्यता का विरोध और पेंशन बहाली की मांग
- प्रदेश के सभी 10 संभागों से पहुंचे शिक्षकों का प्रदर्शन
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने की मांग को लेकर रविवार को प्रदेशभर के शिक्षक राजधानी भोपाल में सड़कों पर उतर आए। शिक्षक संघर्ष समिति एवं वरिष्ठता बहाली मंच के बैनर तले लिंक रोड नंबर-2 स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित विशाल ध्यानाकर्षण धरने में प्रदेश के सभी 10 संभागों से आए हजारों शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
शिक्षकों ने स्पष्ट दोटूक कहा कि वे किसी भी हाल में टीईटी नहीं देंगे और जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
'डीएड-बीएड से चयनित, अब उम्र के इस पड़ाव पर परीक्षा क्यों?'
अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने धरना स्थल को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार टीईटी लागू कर 'राष्ट्र निर्माताओं' को नीचा दिखाने का काम कर रही है। वर्ष 1998 या उसके बाद भर्ती हुए शिक्षक डीएड और बीएड की विधिवत पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही सेवा में आए हैं।
उन्होंने तीखा सवाल दागा, "हम परीक्षा से डर नहीं रहे हैं, लेकिन क्या दादा-दादी और नाना-नानी की उम्र में सरकार हमारी दोबारा परीक्षा लेगी? 28 साल की सेवा के बाद योग्यता साबित करने का दबाव बनाना शिक्षकों का अपमान है।"
'28 साल की सेवा, लेकिन पोर्टल पर सिर्फ 8 साल दर्ज'
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके वर्षों के अनुभव और सेवाओं को नजरअंदाज कर दिया है। 10 साल का छठा वेतनमान और ढाई साल का सातवां वेतनमान रोक दिया गया है। करीब 20 से 28 वर्षों की प्रथम नियुक्ति अवधि को सेवाकाल में नहीं जोड़ा जा रहा है, जिससे एजुकेशन पोर्टल पर 1998 में नियुक्त शिक्षकों का कार्यकाल महज 8 वर्ष दिख रहा है।
वरिष्ठता समाप्त होने से शिक्षकों के क्रमोन्नति और पदोन्नति के हक पर सीधा डाका पड़ा है।
'सांसद-विधायक आजीवन पेंशन लें, तो शिक्षक क्यों वंचित?'
पुरानी पेंशन योजना को लेकर शिक्षकों ने जनप्रतिनिधियों के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया। संघ के नेताओं ने कहा कि सांसद और विधायक निर्वाचित होने पर आजीवन पेंशन, वेतन और भत्ते पाते हैं। समाज के हर वर्ग के शिक्षकों ने कभी इस पर आपत्ति नहीं उठाई, फिर अपनी पूरी जिंदगी राष्ट्र निर्माण और बच्चों के भविष्य को संवारने में खपा देने वाले शिक्षकों को पुरानी पेंशन के अधिकार से वंचित क्यों रखा जा रहा है?
प्रदेश के सभी 10 संभागों से पहुंचे शिक्षक
रविवार सुबह 11 बजे से ही भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग के विभिन्न जिलों से शिक्षक-शिक्षिकाएं अंबेडकर पार्क जुटना शुरू हो गए थे। दोपहर 1 बजे से विधिवत धरना शुरू हुआ।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने टीईटी का फैसला तुरंत निरस्त नहीं किया और पुरानी पेंशन तथा प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता की मांग पूरी नहीं की, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।