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भोपाल में पॉक्सो और SC/ST एक्ट का मामला निकला बेबुनियाद; DNA जांच फेल, पीड़िता के बयान के बाद कोर्ट ने खात्मा किया मंजूर

न्यायालय में पीड़िता ने भगवान सिंह को पहचानने से इनकार किया। गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके। इन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने पुलिस की...और पढ़ें

By naman MishraEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 02:25:25 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 02:25:25 PM (IST)
भोपाल में पॉक्सो और SC/ST एक्ट का मामला निकला बेबुनियाद; DNA जांच फेल, पीड़िता के बयान के बाद कोर्ट ने खात्मा किया मंजूर
प्रतीकात्मक

HighLights

  1. पुलिस को आरोपी भगवान सिंह मेवाड़ा के खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले
  2. श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में पॉक्सो और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज था मामला
  3. डीएनए जांच में पुष्टि नहीं, पीड़िता और पिता ने आरोपी को पहचानने से इनकार किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में नाबालिग से छेड़छाड़ और यौन अपराध के साथ अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पुलिस जांच के दौरान आरोपी भगवान सिंह मेवाड़ा के खिलाफ अभियोजन योग्य कोई साक्ष्य नहीं मिला।

विशेष न्यायालय ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन को स्वीकार करते हुए प्रकरण समाप्त करने की अनुमति दे दी।

ये था मामला

पुलिस के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रवींद्र भवन क्षेत्र में एक नाबालिग को भगवान सिंह मेवाड़ा और एक अन्य व्यक्ति बहला फुसलाकर पार्किंग के पीछे ले गए थे और उसके साथ गलत काम किया गया।

शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम और एससी एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था।

पुलिस को नहीं मिले साक्ष्य

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल की तस्दीक के लिए पीड़िता को मौके पर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वह घटनास्थल की स्पष्ट पहचान नहीं कर सकी।

उसके अलग अलग स्थान बताए जाने के कारण पुलिस घटनास्थल का सत्यापन नहीं कर पाई। शिकायत में बताए गए कुछ गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके।

जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि जिस दुकान और दुकानदार को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया गया था, उसके संबंध में भी पुलिस को विरोधाभासी जानकारी मिली।

संबंधित व्यक्ति ने घटना देखने से इनकार किया। मोबाइल की स्थिति और स्थान संबंधी जांच में भी बताए गए घटनास्थल पर संबंधित लोगों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई।

पुलिस ने आरोपी भगवान सिंह की घटना के समय मौजूदगी की भी जांच की। उसके पक्ष में घटना के समय अन्य स्थान पर होने से संबंधित साक्ष्य सामने आए। व

हीं, एक व्यक्ति द्वारा मामले को खत्म करने के लिए बातचीत किए जाने के आरोप की भी जांच की गई, लेकिन इसमें भी आरोपी भगवान सिंह की भूमिका प्रमाणित नहीं हो सकी।

डीएनए जांच में भी नहीं हुई पुष्टि

मामले में फोरेंसिक जांच सबसे अहम रही। पीड़िता के जींस और चिकित्सकीय नमूने से संबंधित जांच में आरोपी भगवान सिंह की डीएनए प्रोफाइल की पुष्टि नहीं हुई।

पुलिस जांच में पीड़िता के कपड़ों से प्राप्त मिश्रित पुरुष डीएनए प्रोफाइल में भी आरोपी की पुरुष डीएनए प्रोफाइल मौजूद नहीं पाई गई।

यह भी पढ़ें- 'पुलिस ने पकड़ीं, निगम के गले पड़ीं: भोपाल के कांजी हाउस में बंद 44 भैंसें खा गईं 13 लाख का चारा, अब पुलिस को वापस लौटाने की तैयारी

आरोपी को पहचानने से किया इनकार

इसके अलावा पीड़िता ने न्यायालय के समक्ष दिए बयान में भगवान सिंह को पहचानने से इनकार किया। उसने कहा कि उसके साथ घटना हुई थी, लेकिन उसने पुलिस को भगवान सिंह का नाम नहीं बताया था। पीड़िता के पिता ने भी आरोपी को पहचानने से इनकार किया और मामले को समाप्त करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।


न्यायालय ने माना कि पीड़िता और उसके पिता द्वारा आरोपी की पहचान से इनकार, गवाहों के बयानों, तकनीकी साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट से भगवान सिंह के खिलाफ अभियोजन योग्य साक्ष्य सामने नहीं आया।

पुलिस ने भी इसी आधार पर खात्मा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। विशेष न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार कर लिया और प्रकरण का परिणाम अभिलेख में दर्ज करने के निर्देश दिए।