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त्विषा शर्मा मामला: गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर CBI का विरोध, हाई कोर्ट से बेल खारिज करने की मांग

सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को प्रभावशाली बताते हुए गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है।

By bhupendra Singh RajputEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 05:49:35 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 05:49:35 PM (IST)
त्विषा शर्मा मामला:  गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर CBI का विरोध, हाई कोर्ट से बेल खारिज करने की मांग
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका के मामले में सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। फाइल फोटो।

HighLights

  1. गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सीबीआई ने हाई कोर्ट में जवाब दाखिल किया
  2. जमानत का सीबीआई ने किया विरोध, याचिका खारिज करने का आग्रह किया
  3. गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताई

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। मामला एमसीआरसी क्रमांक 37723/2026, गिरिबाला सिंह बनाम सीबीआई से संबंधित है।

सीबीआई ने याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि मामले की जांच में आरोपित की भूमिका से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं और आगे की जांच भी कुछ पहलुओं पर जारी है। सीबीआई ने हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज करने का आग्रह किया है।


नवविवाहिता की मौत के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर

सीबीआई के जवाब के अनुसार, 12 मई 2026 की रात त्विषा शर्मा अपने ससुराल में फांसी पर लटकी मिली थीं। उन्हें आरोपित पक्ष के लोग एम्स भोपाल ले गए, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद अप्राकृतिक मृत्यु के संबंध में कार्रवाई की गई।

मामले में 15 मई 2026 को कटारा हिल्स थाने में एफआईआर क्रमांक 133/2026 दर्ज की गई थी। इसमें गिरिबाला सिंह और उनके बेटे सामर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

सीबीआई के मुताबिक, गिरिबाला सिंह मृतका की सास और सामर्थ सिंह उसके पति हैं। एफआईआर में दोनों पर मृतका को दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद सीबीआई ने संभाली जांच

सीबीआई के जवाब में बताया गया है कि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद सीबीआई ने 25 मई 2026 को एफआईआर को दोबारा दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली।

सीबीआई ने अपने जवाब में कहा है कि राज्य पुलिस की जांच में कुछ कमियां सामने आई थीं। इनमें प्रथम पोस्टमार्टम कराने के तरीके से संबंधित पहलू भी शामिल हैं। सीबीआई के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों में मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई।

यह भी पढ़ें- त्विषा शर्मा डेथ केस : गिरिबाला की जमानत पर सुनवाई फिर टली, 30 सितंबर को संभावित

आवाज के नमूने को लेकर भी विवाद

सीबीआई ने जवाब में बताया कि आरोपित को पहले अग्रिम जमानत मिली थी, लेकिन 27 मई 2026 को हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के बाद 28 मई को उसे गिरफ्तार किया गया। सीबीआई टीम ने 9 और 10 जुलाई को केंद्रीय जेल भोपाल जाकर विशेषज्ञों की मदद से आवाज का नमूना लेने का प्रयास किया।

एजेंसी का आरोप है कि आरोपित ने आवाज का नमूना देने में सहयोग नहीं किया। बाद में न्यायालय के आदेश के बाद उसका शेष आवाज नमूना लिया गया। सीबीआई ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि जांच के दौरान मृतका के बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित जानकारी जुटाई गई।

एजेंसी का दावा है कि दोनों आरोपियों द्वारा मृतका के खाते में अलग-अलग मौकों पर राशि भेजे जाने के साक्ष्य मिले हैं और इन लेनदेन की जांच की गई है। सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को प्रभावशाली बताते हुए गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है।