नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। ट्रेनों में भोजन और चाय-पानी बेचने वाले वेंडर किस कंपनी के कर्मचारी हैं, इसकी जानकारी यात्रियों को अब आसानी से मिल सकेगी। तय कीमत से अधिक रुपये मांगने या खराब गुणवत्ता का खाद्य पदार्थ बेचने पर यात्री वेंडर की पहचान के साथ शिकायत कर सकेंगे।
रेलवे निजी कंपनियों के वेंडरों की टी-शर्ट पर कंपनी का नाम और मोबाइल नंबर लिखने की व्यवस्था शुरू कर रहा है।
शिकायत पर जबावदेही तय होगी
भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को खानपान सेवाओं से जुड़ी शिकायतें रोज मिलती हैं। इनमें सबसे अधिक शिकायतें तय कीमत से ज्यादा वसूली और खराब गुणवत्ता की होती हैं। ट्रेनों में खानपान सेवा आईआरसीटीसी के साथ निजी कंपनियां भी देती हैं। अब तक शिकायत के दौरान यात्री वेंडर की पहचान नहीं बता पाते थे, जिससे सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होता था।
नई व्यवस्था के बाद यात्री कंपनी और कर्मचारी का नाम बता सकेंगे। इससे जांच में समय घटेगा और संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय होगी। व्यवस्था लागू करने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जल्द ही प्रदेश से होकर गुजरने वाली प्रीमियम और महत्वपूर्ण मेल ट्रेनों में इसे शुरू किया जाएगा। आईआरसीटीसी अपने वेंडरों की जैकेट पर संस्थान का लोगो और क्यूआर कोड लगाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुका है।
अभी इन ट्रेनों में होगा बदलाव
- कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस – 12649/12650
- कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस – 18237/18238
- मंगलाद्वीप एक्सप्रेस – 12617/12618
- गोवा एक्सप्रेस – 12779/12780
- पुष्पक एक्सप्रेस – 12533/12534
- ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस – 12615/12616
- आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस – 20805/20806
- मालवा एक्सप्रेस – 12919/12920
- अहमदाबाद–बरौनी एक्सप्रेस – 19483/19484
- कर्नाटक एक्सप्रेस – 12627/12628
- आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस – 12707/12708
ट्रेनों में खानपान सेवा की ओवरचार्जिंग और गुणवत्ता को लेकर रोजाना 20 से 25 शिकायतें मिलती हैं। कई बार निजी कंपनियों के वेंडरों की गलती के लिए भी आईआरसीटीसी को जिम्मेदार माना जाता है, जिससे उसकी छवि प्रभावित होती है। नई व्यवस्था से वेंडर और कंपनी की पहचान आसान होगी और कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय की जा सकेगी। -राजेंद्र बोरबन, रीजनल मैनेजर, आईआरसीटीसी