MP के 99 हजार शिक्षकों के लिए खुशखबरी; मिलेगी पुरानी पेंशन, HC ने पलटा सरकार का फैसला
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कहा कि जब सरकार शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को मान्य कर क्रमोन्नति और वरिष्ठता का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 11:37:13 AM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 11:37:13 AM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- मप्र के शिक्षकों को पुरानी पेंशन पर राहत
- हाईकोर्ट ने सरकार की दलील खारिज की
- 99 हजार से अधिक शिक्षकों पर फैसले का असर
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। पुरानी पेंशन के लिए संघर्ष कर रहे प्रदेश के शिक्षकों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक फैसला मिला है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब सरकार शिक्षाकर्मियों की पिछली सेवाओं को मान्य कर क्रमोन्नति और वरिष्ठता का लाभ दे रही है, तो उन्हें पुरानी पेंशन (ओपीएस) से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने 2018 में संवर्ग संविलियन को नई नियुक्ति मानने की सरकारी दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। साथ ही, याचिकाकर्ता शिक्षिका करुणा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एनपीएस फंड को ओपीएस फंड में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।
99 हजार शिक्षकों को दायरे से बाहर किया था
मध्य प्रदेश में करीब पौने चार लाख शिक्षक हैं। इनमें 1998 से 2005 के बीच नियुक्त 99 हजार से अधिक अध्यापक/शिक्षक शामिल हैं। मप्र में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) अनिवार्य की गई थी।
शिक्षाकर्मी के रूप में हुई नियुक्ति
इन शिक्षकों की मूल नियुक्ति 1998 से 2001 या 2003 के दौरान शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। इस आदेश के तहत उनकी नियुक्ति तिथि 2005 से पहले की मानी गई, इसी आधार पर सरकार ने उन्हें पुरानी पेंशन देने से इनकार किया था, जिसे हाईकोर्ट ने अब राहत देते हुए खारिज कर दिया है।