राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों और स्कूल शिक्षा व आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे अंशकालीन, अस्थाई कर्मचारी अब अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के मैदान में उतर गए हैं।
पंचायत चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी, पंप चालक, रसोइए और स्कूलों, छात्रावासों व आश्रमों में कार्यरत कर्मचारियों ने 28 और 29 सितंबर को दो दिवसीय कामबंद हड़ताल का आह्वान किया है।
भाजपा कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन
ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर सोमवार को प्रदेशभर से कर्मचारी भोपाल पहुंचे। कर्मचारियों ने भाजपा कार्यालय के सामने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं।
मोर्चे का कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।
20 साल की सेवा के बाद भी 2 से 4 हजार का मानदेय
संयुक्त मोर्चा के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने प्रांतीय अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के नेतृत्व में आंदोलन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के कर्मचारी ई-पंचायत व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता और नल-जल व्यवस्था जैसी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इसके बावजूद कई कर्मचारियों को उनकी वर्षों की सेवा के अनुपात में सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों, छात्रावासों और आश्रम शालाओं में 20-20 वर्षों से सेवाएं दे रहे अंशकालीन एवं अस्थाई भृत्य और रसोइयों को भी 2 से 4 हजार रुपये तक का मानदेय मिल रहा है। वर्तमान महंगाई में इतनी राशि में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल है।
स्थायीकरण और न्यूनतम वेतन की मांग
मोर्चे ने वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा नियमावली, सम्मानजनक पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि स्थायीकरण, न्यूनतम वेतन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
ये हैं प्रमुख मांगें
चतुर्थ श्रेणी का दर्जा: अंशकालीन व अस्थाई भृत्य, सफाईकर्मी, पंप चालक, चौकीदार और रसोइयों को स्थायी कर्मचारी घोषित कर चतुर्थ श्रेणी का दर्जा दिया जाए।
समान न्यूनतम वेतन: न्यूनतम वेतन संबंधी प्रावधानों के अनुरूप उचित और समान न्यूनतम वेतन दिया जाए।
सेवा नियमावली व सामाजिक सुरक्षा: कार्य समय, अवकाश, पीएफ, ईएसआई, पेंशन, बीमा, चिकित्सा सुविधा और कार्यस्थल सुरक्षा सहित स्पष्ट सेवा शर्तें लागू की जाएं।
एरियर का भुगतान: पूर्व में रोके गए मानदेय अंतर और पात्र एरियर का भुगतान किया जाए। बिना उचित प्रक्रिया के कर्मचारियों को हटाने पर रोक लगाई जाए।
संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारियों ने प्रदेशभर के कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। मोर्चे ने प्रदेश सरकार से मांगों पर तत्काल पहल कर वर्षों से लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की है।