मप्र सरकार पर बढ़ा आर्थिक बोझ: साढ़े 4 हजार करोड़ का और लिया कर्ज, कुल उधारी 5 लाख 33 हजार करोड़ के पार
प्रदेश पर 5.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है। दिसंबर तक बाजार ऋण क...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 08:01:39 AM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 08:01:39 AM (IST)
सरकार ने साढ़े 4 हजार करोड़ रुपये का ऋण भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से और लिया है। प्रतीकात्मक फोटो।HighLights
- सरकार ने लिया 4500 करोड़ रुपये का कर्ज
- प्रदेश पर 5.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण
- सड़क, एक्सप्रेस वे, सिंचाई और बिजली पर होगा खर्च
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास के कामों पर फोकस कर रही है। इसके लिए वित्तीय प्रबंधन स्वयं के संसाधनों के साथ बाजार से कर्ज लेकर किया जा रहा है। सरकार ने साढ़े 4 हजार करोड़ रुपये का ऋण भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से और लिया है।
इस राशि का उपयोग पूंजीगत कामों पर किया जाएगा। इसे मिलाकर प्रदेश के ऊपर कुल ऋण 5 लाख 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
इस वर्ष में 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज
प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद के अनुपात में 87 हजार करोड़ रुपये कर्ज ले सकती है। दिसंबर तक 58 हजार 274 करोड़ रुपये की बाजार ऋण सीमा स्वीकृत है। 19 अक्टूबर को तीन अलग-अलग हिस्सों में 4,500 करोड़ रुपये के बाजार ऋण को मिलाकर इस वित्तीय वर्ष में 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है।
विकास कार्यों पर होगा खर्च
वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं, विद्युत अधोसंरचना, सड़क, एक्सप्रेस वे तथा अन्य पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में ऋण का उपयोग होता है। इससे उत्पादन, रोजगार तथा सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वृद्धि होती है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में पिछले दो दशकों में सड़क, पुल, सिंचाई, ऊर्जा और शहरी अधोसंरचना के विस्तार पर निवेश किया गया है। इस वर्ष में पूंजीगत व्यय एक लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है।
चुकाते भी जा रहे हैं ऋण
उधर, प्रदेश के ऋण प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष समय पर मूलधन और ब्याज का भुगतान है। पिछले वित्तीय वर्ष में 29 हजार 980 करोड़ रुपये का ऋण पुनर्भुगतान किया। अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 12 हजार 73 करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान किया जा चुका है।
अभी तक प्रदेश ने समयसीमा में ऋण और ब्याज का भुगतान किया है, जिसके कारण मध्य प्रदेश की साख वित्तीय संस्थाओं के बीच अच्छी है।