
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा का जल निर्मल किया जाएगा। नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और उद्योगों को पानी की निरंतर सप्लाई के लिए शहर के गंदे पानी (वेस्टवाटर) को आधुनिक तकनीक से उपचारित कर उपयोग में लाने के लिए 165 करोड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
इसमें सुरासा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पानी को एडवांस्ड टर्शियरी ट्रीटमेंट तकनीक से रीसाइकिल कर उद्योगों को दिया जाएगा। इससे जहां उद्योगों को पानी की आवश्यकता की पूर्ति होगी, वहीं शिप्रा में गंदा पानी मिलना बंद हो जाएगा। इस परियोजना के लिए राशि की व्यवस्था बैंक लोन और बांड से होगी।
औद्योगिक मानकों पर खरा उतरने के लिए पानी को बेहद कड़े फिल्ट्रेशन प्रोसेस से गुजारा जाएगा। सुरासा एसटीपी से निकलने वाले पानी को डिस्क/मीडिया फिल्ट्रेशन, प्रेशर सैंड फिल्टर, एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर, अल्ट्राफिल्ट्रेशन (यूएफ) और जरूरत पड़ने पर आरओ (रिवर्स आस्मोसिस) तकनीक से पूरी तरह साफ किया जाएगा। इसके बाद क्लोरीन की मदद से इसका शत-प्रतिशत कीटाणुशोधन कर इसे फैक्ट्रियों के कूलिंग टावर और बायलर फीड के उपयोग लायक बनाया जाएगा।
सुरासा में 40 लाख लीटर क्षमता का भूमिगत जलाशय (यूजीएसआर) और विक्रम नगर में 50 लाख लीटर क्षमता की ऊंची पानी की टंकी (ईएसआर) बनाई जाएगी। पानी की सप्लाई के लिए आठ से 10 किलोमीटर लंबी मुख्य राइजिंग पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पानी के बहाव और दबाव की रीयल-टाइम (लाइव) मॉनीटरिंग के लिए ऑटोमेशन सिस्टम लगेगा।
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गंदे पानी को साफ कर दोबारा उपयोग किया जाएगा। इससे नदी में गंदा पानी नहीं बहेगा। मौजूदा उद्योगों को 15 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) और विक्रम उद्योगपुरी के आगामी विस्तार के लिए 35 एमएलडी पानी दिया जाएगा।
सिंहस्थ-2028 से पहले शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने और जल के पुनः उपयोग की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है। उपचारित जल उद्योगों को उपलब्ध होने से ताजे पानी की मांग कम होगी। परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और गुणवत्ता का ध्यान रखने के प्रयास किए जाएंगे। -मुकेश टटवाल, महापौर, उज्जैन