समय पर इलाज न मिलने से जा रही हाथियों की जान; MP में वन्यजीव डॉक्टरों के कैडर को लेकर बड़ा खुलासा
मध्यप्रदेश वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सकों का अलग कैडर नहीं है, जिससे विशेषज्ञ उपचार की उपलब्धता सीमित है।
Publish Date: Sat, 15 Aug 2026 01:53:09 PM (IST)Updated Date: Sat, 15 Aug 2026 01:53:09 PM (IST)
बांधवगढ़ के जंगल में दिखाई दे रहा एक जंगली हाथी। फाइल फोटो।HighLights
- वन्यजीवों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
- सतपुड़ा की हथिनी स्मिता की मौत से सवाल
- बांधवगढ़ में भी 10 हाथियों की हाे चुकी मौत
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश हाथियों का स्थायी ठिकाना बन गया है। यहां जंगली हाथियों के अलावा वन विभाग के प्रशिक्षित हाथी भी हैं, लेकिन इन वन्यजीवों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता ही नहीं है।
इस कारण समय पर उपचार न मिलने से वन्यजीव जान गवां रहे हैं। हाल ही में 10 अगस्त को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की मादा हाथी स्मिता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
लगातार हो रही हाथियों की मौत
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना परिक्षेत्र में 46 वर्षीय मादा हाथी स्मिता प्रशिक्षित होनहार थी। 9 अगस्त को उसे जंगल में छोड़ा गया था, जहां एक आक्रामक नर हाथी कृष्णा ने उस पर हमला कर दिया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। जब अगले दिन उसे लाया गया, तो उसके शरीर पर गहरे घाव थे।
इसी तरह बांधवगढ़ में कोदो की फसल खाने से 10 हाथियों को समय पर उपचार न मिलने पर मृत्यु हो गई थी। उस समय भी वन्यप्राणी चिकित्सक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में उपलब्ध नहीं थे।
बता दें कि वन विभाग में वन्यजीव चिकित्सक का कैडर ही नहीं है। जानकारी के अनुसार हथिनी स्मिता की मृत्यु के बाद सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गई है। एक हथिनी अंजुगम की उम्र 75 साल से अधिक होने के कारण उसे रिटायर कर दिया गया है। वहीं बांधवगढ़ क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 70 हाथी यहां विचरण कर रहे हैं।
वन विभाग में 11 पशु चिकित्सक, दो शल्य चिकित्सक
पशु (वन्यजीव) चिकित्सक के 10 पदों पर संविलियन कर वन विभाग में 10 पशु चिकित्सक पदस्थ हैं। एक पशु चिकित्सक तथा सहायक शल्य पशु चिकित्सकों के दो पदों पर पशु चिकित्सा विभाग से वन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किए जाते हैं।
इन पशु चिकित्सकों पर ही राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों की देखरेख एवं चिकित्सा का जिम्मा है। बता दें कि प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, नौ टाइगर रिजर्व, 26 अभयारण्य और एक ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व है।