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MP Tiger Reserve Safari Update:'बघीरा एप' पर अब पर्यटक भी देंगे फीडबैक; बिना नेटवर्क दर्ज होगी सफारी गाड़ी की स्पीड, लोकेशन और स्टॉप

बघीरा एप में नया विकल्प जोड़ा गया है, जिसके जरिए सफारी के दौरान असुविधा होने पर पर्यटक सीधे वन विभाग तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sun, 04 Oct 2026 06:17:28 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Oct 2026 06:17:28 PM (IST)
MP Tiger Reserve Safari Update:'बघीरा एप' पर अब पर्यटक भी देंगे फीडबैक; बिना नेटवर्क दर्ज होगी सफारी गाड़ी की स्पीड, लोकेशन और स्टॉप
फाइल फोटो।

HighLights

  1. बघीरा एप में नया विकल्प जोड़ा गया है
  2. पर्यटक सीधे वन विभाग तक बात पहुंचा सकेंगे
  3. नेटवर्क न होने पर भी डेटा होगा सेव

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व एक अक्टूबर से पर्यटकों के लिए खुल गए हैं। इसके साथ ही बघीरा एप की अनिवार्यता और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। एप में पर्यटकों के फीडबैक का विकल्प जोड़ा गया है, जिससे सफारी के अनुभव को और बेहतर बनाया जा सके।

अब अगर सफारी के दौरान पर्यटकों को कोई असुविधा होती है तो वह एप के माध्यम से अपनी बात वन विभाग तक पहुंचा सकेंगे।

एप बंद किया तो कार्रवाई

विभाग इस शिकायत या फीडबैक को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई करेगा। इसमें संबंधित क्षेत्र संचालक की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और सफारी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए बघीरा एप को बंद न करने की अनिवार्यता की गई है।


वन विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि कोई सफारी चालक इस एप को बंद करता है, या जानबूझकर इसका उपयोग नहीं करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ये है बघीरा एप

बघीरा एप मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यटकों के अनुशासन और सफारी वाहनों (जिप्सियों) की निगरानी के लिए उपयोग किया जाने वाला एक हाइटेक जीपीएस-बेस्ड ट्रैकिंग एंड्राइड एप है।

फोन से होती है ट्रैकिंग

दरअसल कोई पर्यटक वाहन सफारी के लिए नेशनल पार्क के गेट के अंदर प्रवेश करता है, तो वन विभाग के अधिकारियों द्वारा सफारी वाहन के ड्राइवर या गाइड को एक विशेष मोबाइल फोन दिया जाता है। जिसमें बघीरा एप पहले से इंस्टाल होता है।

सफारी खत्म होने और पार्क से बाहर निकलते समय यह फोन वापस जमा करना अनिवार्य होता है। जितनी देर वाहन जंगल के अंदर रहता है, यह एप उस गाड़ी की हर गतिविधि को ट्रैक करता है।

यह भी पढ़ें- एमपी के टाइगर रिजर्व 1 अक्टूबर से होंगे गुलजार, पहले 15 दिनों की बुकिंग फुल, बांधवगढ़-कान्हा में उमड़ेगी पर्यटकों की भीड़

नेटवर्क न हो तो भी डेटा सेव

यदि नेटवर्क नहीं है (जो कि घने जंगलों में आम है), तो भी एप ऑफलाइन मोड में सारा डेटा (जैसे गाड़ी कहां रुकी, कितनी स्पीड में थी) रिकॉर्ड करता रहता है।

पार्क से बाहर आते ही या नेटवर्क मिलते ही यह डेटा (लगभग 30 मिनट के अंतराल पर) सर्वर पर अपडेट हो जाता है। अब इसमें पर्यटकों के लिए भी फीडबैक देने का विकल्प रखा गया है।