त्विषा शर्मा केस: एम्स दिल्ली ने 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआइ को सौंपी, जिम बेल्ट से मैच हुए गर्दन के घाव
त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में एम्स ने 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी। जिम बेल्ट और गर्दन के निशान मेल खाने से जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंची।
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 08:02:10 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 08:02:10 AM (IST)
त्विषा शर्मा केस की एम्स दिल्ली की 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट। (फाइल फोटो)HighLights
- एम्स ने सीबीआई को 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट सौंपी।
- जिम बेल्ट के निशान गर्दन की चोटों से पूरी तरह मिले।
- हाई कोर्ट आदेश पर एम्स ने दोबारा पोस्टमार्टम किया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में 62 दिन बाद एक बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने शुक्रवार को सीबीआइ को एक सीलबंद लिफाफे में 11 पन्नों की फॉरेंसिक रिपोर्ट सौंप दी है। ये रिपोर्ट इस रहस्यमयी मौत का सच सामने लाने में अहम साक्ष्य साबित हो सकती है।
जिम बेल्ट से लगाई थी फांसी
- एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ सुधीर गुप्ता ने कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए रिपोर्ट पर सीधे तौर पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया, क्योंकि इस मामले को पूरी तरह गोपनीय रखने के कोर्ट के आदेश हैं, एक कॉपी कोर्ट को भेजी गई।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर बताया कि मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक हर एंगल से बारीकी से जांच की है, जो सीबीआइ को इस मौत की गुत्थी सुलझाने में मदद करेगी। एम्स द्वारा की गई हिस्टोपैथोलाजिकल (ऊतक) और फॉरेंसिक जांच में यह साफ हुआ है कि घटना में इस्तेमाल की गई जिम बेल्ट पर मृतका की त्वचा के ऊतक पाए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बेल्ट का पैटर्न मृतका की गर्दन पर बने चोट के निशानों से पूरी तरह मैच हो गया है। बताया जा रहा है कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमार्टम में इस जिम बेल्ट और गर्दन की चोटों के बीच संबंध स्थापित नहीं हो पाया था, क्योंकि शुरुआती जांच के दौरान स्थानीय जांच अधिकारी पोस्टमार्टम के समय मेडिकल बोर्ड के सामने वह बेल्ट पेश करने में नाकाम रहे थे। कोर्ट ने 22 मई को दोबारा पाेस्ट मार्टम के दिए थे निर्देश
- शुरुआती जांच से असंतुष्ट होकर मृतका के स्वजनों ने न्याय के लिए कोर्ट गए थे। स्वजनों की मांग और मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने बीते 22 मई को शव का दोबारा पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली के डाक्टरों से कराने का आदेश दिया था।
- हाई कोर्ट के आदेश पर एम्स के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, जिसने 24 मई को दूसरा पोस्टमार्टम किया। इस दूसरे पोस्टमार्टम की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। फारेंसिक सबूतों को पुख्ता करने के लिए एम्स की इस टीम ने भोपाल आकर उस घटना स्थल का भी बारीकी से मुआयना किया था, जहां त्विषा शर्मा का शव मिला था।
- हम बता दें कि यह पूरा मामला शहर के एक हाई-प्रोफाइल परिवार से जुड़ा हुआ है। मृतका त्विषा शर्मा, भोपाल की सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं। वह 12 मई 2026 को बागमुगालिया स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकी पाई गई थीं।
आरोपियों की बढ़ सकती है मुश्किलें
इस मामले में लगातार उठ रहे सवालों और परिजनों के गंभीर आरोपों के बाद जांच की कमान सीबीआइ को सौंपी गई थी। अब एम्स की इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद मामले में शामिल आरोपित की मुश्किलें बढ़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है। इसी बीच, सीबीआइ अधिकारियों का दावा है कि उनकी जांच अब अपने अंतिम चरण में है और वे जुलाई के आखिरी सप्ताह में इस पूरे मामले का चालान कोर्ट में पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।