
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपित समर्थ सिंह की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर मंगलवार को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट शोभना भलावे की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने जमानत के संबंध में दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
सुनवाई के दौरान आरोपित पक्ष के अधिवक्ता अजय गुप्ता ने मामले के दस्तावेजों और केस को विस्तार से पढ़ने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।
समर्थ सिंह की ओर से दावा किया गया कि सीबीआई ने 17 अगस्त को जो रिपोर्ट पेश की, वह जांच पूरी होने की रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जांच अभी भी जारी है। दहेज की मांग और दहेज मृत्यु से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच बाकी है। मृतका त्विषा के आईफोन से प्राप्त होने वाले आंकड़ों की निष्कर्ष रिपोर्ट, डीवीआर के आंकड़ों की जांच तथा केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी लंबित है।
अदालत के समक्ष यह तर्क रखा है कि समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ्तार किया गया था। 90 दिन की अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर धारा 187(3) के तहत डिफॉल्ट जमानत का अधिकार बनता है। बचाव पक्ष ने सीबीआई की 17 अगस्त की रिपोर्ट को अधूरी जांच की रिपोर्ट बताते हुए कहा कि केवल कागजात का बंडल दाखिल कर इसे आरोप पत्र नहीं माना जा सकता।
वहीं, मृतका के पिता और पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधि नवनिधि शर्मा की ओर से इस जमानत आवेदन का विरोध किया गया है। उनके अधिवक्ता अंकुर पडनेय ने अदालत में दाखिल आपत्ति में कहा कि सीबीआई ने 17 अगस्त को ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
यह रिपोर्ट समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के 87वें दिन दाखिल हुई, जबकि 90 दिन की अवधि 20 अगस्त को पूरी होनी थी। ऐसे में जांच एजेंसी ने निर्धारित अवधि के भीतर रिपोर्ट पेश कर दी थी। पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि रिपोर्ट को अंतिम रिपोर्ट के रूप में दाखिल किया गया है और अदालत ने 25 अगस्त को इसका संज्ञान भी ले लिया था। इसलिए आरोपित को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं बनता।
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आपत्ति में उच्चतम न्यायालय के संजय दत्त बनाम सीबीआई, एम. रविंद्रन बनाम DRI, डायनेस डालमिया बनाम सीबीआई और सीबीआई बनाम कपिल वाधवान सहित अन्य फैसलों का हवाला दिया गया है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, आगे की जांच जारी रहना अपने आप में पहले दाखिल आरोप पत्र को अधूरा नहीं बनाता। मामले में ट्विषा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में मौत हुई थी। इसके बाद 15 मई को कटारा हिल्स थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।