
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। उत्तराखंड और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करेगा। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से पांच सदस्यीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति दोनों राज्यों के अधिनियम का अध्ययन करके 60 दिन में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी। यूसीसी पर समिति के गठन और अन्य प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में विधि एवं विधायी विभाग को अधिकृत करने का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही बैठक में लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 19 हजार 810 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
समान नागरिक संहिता अधिनियम तैयार करने के लिए समिति सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगी। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारी, वरिष्ठ वकील, महिला अधिकार, सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता के साथ किसी एक विश्वविद्यालय के कुलगुरू या वरिष्ठ प्रोफेसर को सदस्य बनाया जाएगा। समिति उत्तराखंड और गुजरात में अपनाई गई प्रक्रिया व मॉडल का अध्ययन कर रिपोर्ट 60 दिन में प्रस्तुत करेगी, लेकिन यह अवधि परिस्थितियों को देखकर बढ़ाई भी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि यूसीसी को लेकर प्रचार-प्रसार किया जाए। इसे लेकर जो भ्रम है, उसे दूर करने की आवश्यकता है और इसमें सबको सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कैबिनेट की बैठक में लोक निर्माण विभागों को 2031 तक विभिन्न कामों के लिए 10,801 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें एन्यूटी (निश्चित अंतराल के बाद दी जाने वाली राशि) भुगतान के लिए 4,564 करोड़, सड़क विकास निगम को बाह्य वित्त परियोजना के लिए 5,322 करोड़, 'बनाओ, खूब चलाओ और सौंपो मॉडल' पर बने मार्गों के विकास एवं पर्यवेक्षण के लिए 150 करोड़ और परियोजनाओं की समाप्ति पर भुगतान के लिए 765 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286 करोड़ 26 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। इससे सागर तहसील के 27 ग्रामों की 7200 हेक्टेयर भूमि सिंचाई होगी।
वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री पोषण शक्ति और मध्याह्न भोजन सहित विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों के संचालन के लिए 3,553 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं के माध्यम से कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना, नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देने और प्रदेश के वन पट्टाधारियों के लिए हस्तचलित व बैलचलित कृषि यंत्रों पर अनुदान योजना आगामी पांच वर्षों के निरंतर संचालन पर 2,250 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इसी तरह, नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना योजना को पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 1,674 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं पर 1,005 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर एवं महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 240 करोड़ का प्रावधान किया गया। नए वन स्टॉप सेंटर का संचालन मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा, धार में मनावर और पीथमपुर, इंदौर में लसूडिया और सांवेर एवं झाबुआ में पेटलावद में किया जाएगा।