
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर में ई-रिक्शा बेलगाम हो गए हैं। सड़कों पर इनका जंगलराज चल रहा है। शहर में 15 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। आरटीओ के रिकार्ड में सिर्फ नौ हजार ई-रिक्शा ही रजिस्टर्ड हैं। बाकी करीब 6000 वाहन बिना रजिस्ट्रेशन, बिना नंबर और बिना बीमा के अवैध रूप से चल रहे हैं। इससे ट्रैफिक तो बिगड़ ही रहा है, हादसा होने पर पीड़ित को बीमा का क्लेम तक नहीं मिलता।
नवदुनिया की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि इस पूरे खेल में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी सबसे बड़ी वजह है। डीलर बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन बेच रहे हैं और चालक बिना लाइसेंस चला रहे हैं। ई-रिक्शा माफिया खुलेआम सक्रिय है।
नवदुनिया ने प्रभात चौराहा, भोपाल रेलवे स्टेशन रोड और अयोध्या नगर बायपास जैसे व्यस्ततम चौराहों पर जानकारी ली। इस दौरान 100 में से 40 ई-रिक्शा ऐसे मिले जिन पर नंबर प्लेट ही नहीं थी। कई पर तो आगे-पीछे कहीं भी नंबर नहीं लिखा था। वे सवारियों को भरकर बेधड़क दौड़ रहे थे। न रोकने वाला, न टोकने वाला था।
नवदुनिया रिपोर्टर ग्राहक बनकर एक डीलर के पास पहुंचा। डीलर ने कहा कि आपको वाहन मिल जाएगा, 40 हजार रुपये देना होगा। इसके बाद आप कमर्शियल में चला सकते हो। रिपोर्टर ने पूछा कि बिना नंबर के बुकिंग में चला सकता हूं? डीलर बोला कि आप चला सकते हो, पुलिस भी नहीं रोकेगी। नंबर के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि नंबर 20 दिन में आएगा, आप परेशान मत हो। इसमें कोई क्लेम भी नहीं होता है, आप आराम से वाहन ले सकते हो।
बिना रजिस्ट्रेशन के ई-रिक्शा का बीमा भी नहीं होता। हादसा होने पर न चालक का इलाज मिलेगा, न सवारी को मुआवजा। आरटीओ के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिना नंबर के वाहन का एक्सीडेंट होने पर थर्ड पार्टी क्लेम भी खारिज हो जाता है। पीड़ित को अपने खर्च पर इलाज कराना पड़ता है।
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डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश है कि सरकार को ई-रिक्शा की फिटनेस के लिए पॉलिसी बनानी है। फिलहाल ऐसा कोई नियम नहीं है। टैक्स फ्री होने से इसकी संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी निगरानी जिला प्रशासन स्तर पर होती है। कलेक्टर और यातायात पुलिस मिलकर इसके लिए रूट तय करते हैं।
ई-रिक्शा की स्पीड कम होती है और चालक अचानक कहीं भी मोड़ देते हैं। सवारी के लिए बीच सड़क पर रोक देते हैं। ऑटो स्टैंड पर भी कब्जा कर लिया है। शहर के प्रमुख चौराहों प्रभात, अयोध्या, नादरा बस स्टैंड, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, करोंद चौराहा पर शाम को जाम का सबसे बड़ा कारण यही हैं। इनके पास न फिटनेस है, न परमिट होता है।
अभी इसके लिए कोई नियम नहीं आया है। केंद्र सरकार द्वारा ई-रिक्शा को लेकर पॉलिसी बनाई जा रही है। भोपाल में दस हजार के लगभग वाहन पंजीकृत हैं। जो वाहन नहीं हैं, उनकी जांच करवाई जाती है। - जितेंद्र शर्मा, आरटीओ भोपाल
| अवधि | नए पंजीकरण |
| 2023–24 | 3,541 |
| 2024–25 | 3,129 |
| 2025 से अक्टूबर 2026 तक | 3,057 |
| कुल | 9,727 |