
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) का नाम बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ भोपाल में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के इस प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है, वहीं सैकड़ों छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। शनिवार को इस फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और पैदल मार्च निकाला गया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव मोहम्मद जहीर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति), मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कार्यपरिषद द्वारा पारित इस प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की। ज्ञापन में तर्क दिया गया कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली देश के एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके नाम को विश्वविद्यालय से हटाना उनके ऐतिहासिक योगदान का अपमान है और यह संविधान की भावना के खिलाफ है।
इसी मुद्दे पर शनिवार को युवाओं और छात्र समूहों ने अपनी ताकत दिखाई। आरिफ मसूद फैंस क्लब और विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले जहांगीराबाद के जिंसी चौकी से एक विशाल पैदल मार्च शुरू हुआ। यह मार्च लिली टाकीज चौराहे पर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तक पहुंचा। इस प्रदर्शन में करीब 350 लोग शामिल हुए, जिनमें 300 से अधिक कॉलेज के छात्र थे।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है, बल्कि यह भोपाल के युवाओं की भावनाओं और इतिहास से जुड़ा एक स्वतंत्र आंदोलन है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने "बरकतउल्ला हमारी पहचान है" और "इतिहास नहीं मिटने देंगे" के जोरदार नारे लगाए।
नया यूनिवर्सिटी खोलें सरकार, पुराना नाम न बदलें। इस विवाद पर शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली ने विदेशों में रहकर भारत की आजादी की अलख जगाई थी और वे देश की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े प्रतीक थे।
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मध्य प्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि प्रदेश को नए और विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों की जरूरत है, न कि पुराने संस्थानों के नाम बदलने की। यदि सरकार को किसी नए नाम से संस्थान खोलना है तो नई यूनिवर्सिटी बनाए, लेकिन भोपाल की ऐतिहासिक विरासत पर आघात न करे। विरोध कर रहे संगठनों और छात्र नेताओं ने मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि नाम बदलने का यह प्रस्ताव तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र व व्यापक किया जाएगा।