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एम्स भोपाल में 260 कर्मचारियों को हटाने पर बवाल, रातभर ओपीडी के बाहर धरना, 800 मरीजों का इलाज अटका

एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को बिना बताए हटाने पर हंगामा खड़ा हो गया। विरोध में करीब 500 कर्मचारियों ने बुधवार रात से गुरुवा...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 11:39:07 AM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 11:41:59 AM (IST)
एम्स भोपाल में 260 कर्मचारियों को हटाने पर बवाल, रातभर ओपीडी के बाहर धरना, 800 मरीजों का इलाज अटका
एम्स भोपाल की ओपीडी से प्रशासनिक भवन की ओर जाते कर्मचारी।

HighLights

  1. एमजे एजेंसी 1100 में से 516 को ही रखना चाहती थी
  2. विरोध के बाद प्रबंधन ने सभी को वापस लिया
  3. गुरुवार को ओपीडी 6200 से घटकर 5420 पर आई

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एम्स भोपाल में आउटसोर्स एजेंसी द्वारा 260 कर्मचारियों को बिना बताए हटाने पर हंगामा खड़ा हो गया। विरोध में करीब 500 कर्मचारियों ने बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक ओपीडी के बाहर धरना दिया और काम बंद कर दिया। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ा। करीब 800 मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ। कई मरीजों के पर्चे तक नहीं बन पाए।

दरअसल, एम्स भोपाल में हाउसकीपिंग, वार्ड बाय और प्लंबर का काम एमजे एजेंसी के जरिए आउटसोर्स पर होता है। एजेंसी के पास कुल 1100 कर्मचारी हैं। एजेंसी ने नई व्यवस्था के तहत 1100 में से सिर्फ 516 कर्मचारियों को ही रखने का फैसला लिया और 260 कर्मचारियों की लिस्ट निकालकर उन्हें बिना सूचना के हटा दिया।


लिस्ट सामने आते ही अन्य कर्मचारियों में भी डर फैल गया कि उन्हें भी धीरे-धीरे निकाल दिया जाएगा। इसके विरोध में निकाले गए कर्मचारी और बाकी कर्मचारी एकजुट हो गए।

बुधवार रात करीब 500 कर्मचारियों ने एम्स की ओपीडी के बाहर रातभर धरना-प्रदर्शन किया। गुरुवार सुबह वे कौटिल्य भवन के सामने, जहां डायरेक्टर और उप निदेशक प्रशासन का कार्यालय है, धरने पर बैठ गए। मामला तूल पकड़ता देख सुबह एम्स प्रबंधन ने एमजे एजेंसी के संचालकों को बुलाकर बातचीत की। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि किसी भी कर्मचारी को नहीं निकाला जाएगा। इसके बाद सभी 260 हटाए गए कर्मचारियों को वापस रखने पर सहमति बनी।

ओपीडी छह हजार से घटकर 5420 पर आई

विरोध प्रदर्शन के कारण गुरुवार को एम्स की ओपीडी में भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को कुल ओपीडी 5420 रही, जिसमें 740 नए और 4680 पुराने मरीज थे। जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा 6200 से 6500 के बीच रहता है। सुबह से ही रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर आउटसोर्स कर्मचारी बैठे हुए थे। जिससे मरीजों को ओपीडी काउंटर तक नहीं पुंच सके। बाहर लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन पर्चे बनने की रफ्तार बहुत धीमी रही।

मेडिसिन से लेकर कार्डियोलाजी तक ओपीडी घटी

विभाग - 30 सितंबर - एक अक्टूबर

मेडिसिन - 950 - 720

सर्जरी - 680 - 510

आर्थोपेडिक्स - 620 - 480

नेत्र रोग - 540 - 410

ईएनटी - 480 - 350

स्त्री एवं प्रसूति - 580 - 430

शिशु रोग - 520 - 390

कार्डियोलाजी/नेफ्रोलाजी - 450 - 320

अन्य विभाग - 1380 - 1810

कुल - 6200 - 5420

एक बजे तक पर्चा नहीं बना

रायसेन से आए रोहित सिंह ने बताया कि पिता को किडनी की समस्या है। उन्हें दिखाने के लिए एम्स लेकर आया था। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बहुत भीड़ थी। कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पर्चा बनने में काफी देर लगी। दोपहर एक बजे तक भी पर्चा नहीं बन सका। समय निकल गया, इसलिए अब दोबारा एम्स आना पड़ेगा। विदिशा से आए एक मरीज के परिजन ने बताया कि सुबह जल्दी एम्स पहुंच गए थे, ताकि समय पर डाक्टर को दिखा सकें। पर्चा बनवाने के लिए काउंटर पर लंबी लाइन लगी थी। काफी देर इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आया।

कर्मचारियों ने लगाए भुगतान संबंधी आरोप

कर्मचारी राजू सेन ने आरोप लगाया कि एजेंसी में नौकरी देने के नाम पर लेन-देन किया जाता है। उन्होंने बोनस नहीं मिलने, वेतन में अलग-अलग मदों में कटौती और पीएफ जमा नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने प्रबंधन से इन मामलों में लिखित समाधान की मांग की है।

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जागा एम्स प्रबंधन, तत्काल किया समस्याओं का निराकरण

इस मामले के बाद एम्स प्रबंधन ने तुरंत एक्शन लिया। दिन में ही प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों में हुई कुछ गलतफहमी को दूर कर दिया गया है। सभी कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। प्रबंधन ने एमजे एजेंसी के संचालकों के साथ बैठक कर पूरे मामले का तत्काल निराकरण किया। किसी भी कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया गया है और सभी कर्मचारी वापस काम पर लौट आए हैं। प्रबंधन ने कहा कि एम्स भोपाल मरीजों को बेहतर और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।