• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

एमपी में आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निकाय, अब पार्किंग और विज्ञापन होर्डिंग्स से बढ़ेगी आय, गुंडे-बदमाशों को नहीं मिलेंगे ठेके

आर्थिक तंगी का सामना कर रहे मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय अपनी आय बढ़ाने के लिए अब पार्किंग और विज्ञापन के होर्डिंग्स की सहायता लेंगे।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 08:18:14 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 08:18:14 PM (IST)
एमपी में आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निकाय, अब पार्किंग और विज्ञापन होर्डिंग्स से बढ़ेगी आय, गुंडे-बदमाशों को नहीं मिलेंगे ठेके
राजस्व बढ़ाने पर मिलेगा ₹29 करोड़ का इनाम। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. ACS संजय दुबे की फटकार के बाद बदला सिस्टम
  2. भोपाल-इंदौर मॉडल पर सुधरेगी पार्किंग व्यवस्था
  3. राजस्व बढ़ाने पर मिलेगा ₹29 करोड़ का इनाम

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आर्थिक तंगी का सामना कर रहे मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय अपनी आय बढ़ाने के लिए अब पार्किंग और विज्ञापन के होर्डिंग्स की सहायता लेंगे। नगर निगम व निकाय ऐसे स्थल चिह्नित करेंगे, जहां यातायात का दबाव अधिक है। इन्हें चिह्नित कर पार्किंग का ठेका दिया जाएगा। ठेके का आरक्षित मूल्य भी लोकेशन के हिसाब से तय किया जाएगा।

साथ ही प्रयास किया जाएगा कि ठेके ऐसे लोगों को दिए जाएं जो गुंडे-बदमाश न हों। इसकी वजह नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की नाराजगी है। उन्होंने पिछले माह फटकार लगाते हुए निकायों से कहा था कि प्रदेश में गुंडे-बदमाश पार्किंग की पर्ची काटते हैं। पार्किंग में वाहन खड़े करने को लेकर विवाद की स्थिति बनती है। उन्होंने यह भी कहा था कि नगर निगमों, नगर पालिकाओं में पार्किंग की व्यवस्था सुव्यवस्थित हो जाए तो नगरीय निकायों की माली हालत में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।


प्रमुख शहरों में पार्किंग से होने वाली आय की वर्तमान स्थिति

इधर, विभाग का तर्क है कि मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों को पार्किंग से होने वाली कुल वार्षिक आय का कोई एक राज्य-स्तरीय आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है, क्योंकि यह आय प्रत्येक शहर की जनसंख्या, पार्किंग स्थलों की संख्या और वहां की व्यवस्था (जैसे पेड या फ्री पार्किंग) पर निर्भर करती है।

हालांकि, प्रमुख शहरों के हालिया आंकड़ों से स्थिति स्पष्ट होती है कि इंदौर में पीपीपी मॉडल पर आधारित पार्किंग स्थलों से निगम को प्रतिवर्ष 25 से 30 लाख रुपये की आय होती है। उज्जैन में केवल तीन प्रमुख वाहन पार्किंग ठेकों से ही निगम को लगभग पांच लाख से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

ग्वालियर नगर निगम को सालाना 25 लाख रुपये आय होती है। नगर निगम आयुक्त पार्किंग को लेकर नए सिरे से व्यवस्था बना रहे हैं और ठेकों के रेट रिवाइज कर रहे हैं। इसी तरह जबलपुर शहरी क्षेत्र में 16 स्थान चिह्नित कर नगर निगम ने पार्किंग के लिए टेंडर जारी किए हैं।

प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान, फिर भी राजस्व वसूली में पिछड़े

राजस्व आय में श्रेष्ठ कार्य करने वाले स्थानीय निकायों को पुरस्कृत करने के लिए विभागीय बजट में करीब 29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रोत्साहन योजना में आय में वृद्धि करने वाले नगरीय निकायों को पिछले दो वित्तीय वर्षों में राजस्व और गैर-राजस्व आय में हुई वृद्धि के प्रतिशत के अनुसार प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार द्वारा प्रोत्साहन के बावजूद नगरीय निकाय राजस्व वसूली में पिछड़े हैं।

यह भी पढ़ें- NEET-UG 2026: एमपी के 30 जिलों के 283 केंद्रों में होगी परीक्षा, 38 साइबर कमांडो रखेंगे नजर, पुलिस-प्रशासन अलर्ट

विज्ञापन होर्डिंग से आय बढ़ाने में फिसड्डी साबित हो रहे शहर

हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया है कि नगरीय निकाय विज्ञापन होर्डिंग से आय में पिछड़े हैं। ग्वालियर, जबलपुर, सतना जैसे शहरों में स्थिति ठीक नहीं है। भोपाल और इंदौर नगर निगम ने होर्डिंग के टेंडर कर विज्ञापनों से आय बढ़ाने का प्रयास किया है। अन्य शहरों की अपेक्षा यहां कुछ हद तक स्थिति ठीक भी है।